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जनवरी तक दिखने लगेंगी 35 हजार किमी ग्रामीण सड़कें

राज्य सरकार ने कहा है कि गांव और टोलों को जोड़ने के लिए जारी सड़क निर्माण की योजनाएं रफ्तार पकड़ रही हैं और जनवरी-फरवरी तक 35 हजार किलोमीटर सड़कें सतह पर दिखने लगेंगी। ग्रामीण कार्य मंत्री वृशिण पटेल ने बुधवार को कहा कि सरकार के विकास के एजेंडे में गांव की सड़कों की अहम भूमिका है। गांव की सड़कों का विकास नहीं होगा तो राज्य का विकास भी अवरुद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों के विकास का काम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत चल रहा है। इस योजना केतहत 1000 की आबादी वाले गांव-टोलों को मुख्य सड़क से जोड़ने का लक्ष्य है। ऐसे 16 हजार 616 गांव हैं जिनमें 48 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है। इसमें 38 हजार किलोमीटर सड़क के निर्माण की स्वीकृति हो चुकी है।

10 हजार किलोमीटर की स्वीकृति बाकी है। इसमें से 3 हजार किलोमीटर की सड़कों की स्वीकृति के लिए  केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। मंत्री ने कहा है कि पीएमजीएसवाई में टेंडर रेट संशोधित करने का कोई प्रावधान नहीं है। जिससे निर्माण कार्य में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही थी। काफी मशक्कत के बाद राज्य सरकार ने तय किया कि खुद पहल नहीं करेंगे तो सड़कों का निर्माण नहीं होगा। लिहाजा ‘न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम’ के तहत राज्य सरकार ने 658 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

रेट रिवाइज्ड करने की व्यवस्था से जबरदस्त सफलता मिल रही है। ठेकेदार आ रहे हैं और काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएमजीएसवाई में सेंट्रल एजेंसी के काम-काज करने के तरीकों से परेशानी हो रही है। अगर वे समय पर सड़क नहीं बनाते हैं तब भी हम उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जितनी सड़कें उनको बनानी है उसमें से 10 हजार किलोमीटर में उन्होंने हाथ तक नहीं लगाया है।

केन्द्रीय एजेंसियां कहती हैं कि जब तक उनको टेंडर प्रीमियम नहीं मिलेगा वे काम नहीं करेंगी। इसपर राज्य सरकार ने केन्द्र को पत्र भी लिखा है कि केन्द्र अगर टेंडर प्रीमियम देती है तो राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों केन्द्र सरकार के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केन्द्रीय एजेंसियां अगर काम नहीं करेंगी तो सड़कों का निर्माण स्टेट एजेंसी से कराया जाएगा। हालांकि अभी तक केन्द्र की ओर से इसपर कोई जवाब नहीं आया।

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