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'जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहीं हैं जड़ी-बूटियां'

'जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहीं हैं जड़ी-बूटियां'

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बुधवार को इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि जलवायु परिवर्तन के कारण देश में प्राकृतिक पर्यावास का संतुलन बिगड़ रहा है और इससे अनेक औषधीय जड़ी़-बूटियां विलुप्त होती जा रही है।

राष्ट्रपति ने यहां अखिल भारतीय आयुव्रेद कांग्रेस के हीरक जयंती समारोह का उदघाटन करते हुए कहा कि आज जलवायु परिवर्तन के कारण देश में प्राकृतिक पर्यावास का संतुलन बिगड़ रहा है और इससे अनेक औषधीय जड़ी़-बूटियां विलुप्त होती जा रही है जो हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए हमें कारगर प्रयास करने होंगे । इन विलुप्त हो रही जड़ी़-बूटियों का वर्गीकरण कर इन्हें पुनस्र्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड और केंद्रीय औषधीय एवं संगध पौधा संस्थान जैसी संस्थान की मदद ली जा सकती है।

अखिल भारतीय आयुर्वेद कांग्रेस के अध्यक्ष वैदयराज देवेंद्र त्रिगुणा ने इस अवसर पर कहा कि देश में जलवायु परिवर्तन के कारण आज कुटकी, अतीस, कस्तूरी और प्रवाल जैसे अनेक औषधीय पौधे मिलने मुश्किल हो गये। हमें अच्छे औषधीय पौधे पहले हिमाचल प्रदेश से मिलते थे लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब इनका मिलना भी मुश्किल हो रहा है।

 

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