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अंबानी बंधुओं के घमासान में 350,000 करोड़ रुपये का पेच

अंबानी बंधुओं के घमासान में 350,000 करोड़ रुपये का पेच

अनिल अंबानी समूह के असामान्य लाभ के आरोप की धार मोड़ते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आरोप लगाया है कि अनिल अंबानी समूह उससे बाजार कीमत से कम मूल्य पर प्राकृतिक गैस हासिल कर उसके कारोबार के जरिये 350,000 करोड़ रुपये का आसाधारण लाभ कमाना चाहती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज.लि़ (आरआईएल) ने अनिल अंबानी समूह की रिलायंस नेचुरल रिसरेसेज लि़ (आरएनआरएल) की ओर से दायर याचिका के जवाब में कहा कि आरएनआरएल रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी6 से गैस तरजीही मूल्य 2.34 डालर प्रति एमएमबीटीयू पर चाहती है। लेकिन वह समूह की कंपनियों को बाजार दर पर ईंधन की आपूर्ति करेगी। इससे कंपनी को 17 साल तक सालाना 21,000 करोड़ रुपये का लाभ होगा।

आरआईएल ने आरएनआरएल की ओर से जीडीआर लिस्टिंग के लिये निवेशकों के लिये जारी विवरण पुस्तिका की एक प्रति संलग्न करते हुए इसके हवाले से कहा है कि वह संबद्ध बिजली कंपनियों को गैस की आपूर्ति मौजूदा बाजार कीमत पर करेगी। कंपनी के अनुसार, इस प्रकार की बाजार कीमतें सरकार द्वारा मंजूरी कीमत सीमा 4.20 प्रति एमएमबीटीयू (केजी़-डी6 गैस के लिये) को भी पार कर सकती है। आरआईएल ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश के दादरी में बन रहा अनिल अंबानी समूह के बिजली घर को बिना हाथ पैर डुलाए 70,000 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा।

बंबई हाई कोर्ट ने आरआईएल को 2005 के समझौते के अनुपालन का निर्देश दिया है। आरआईएल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि बंबई हाई कोर्ट के आदेश ने उसे सरकार के साथ हुए गैस उत्पादन साझीदारी समझौते और सरकारी नीतियों को तोड़ने की स्थिति में ला खड़ा किया है। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि उत्पादन साझीदारी समझौते (पीएससी) के खिलाफ जाने से गैस उत्खनन में उसका 38,000 करोड़ रुपये का निवेश खतरे में पड़ जाएगा।
   
जवाब में कहा गया है कि पीएससी के तहत सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से कम पर गैस की बिक्री नहीं कर सकती है। और अगर कंपनी को सरकार द्वारा मंजूरी कीमत से कम पर गैस की बिक्री के लिये मजबूर किया जाता है तो उसे बड़े पैमाने पर नुकसान होगा।
  
सरकार ने विशेष अनुमति याचिका में कहा कि दोनों भाइयों ने निजी समझौते के जरिये राष्ट्रीय संसाधन को बांटने की कोशिश की है और उनके इस कृत्य से देश के हितों को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।
   
आरआईएल ने कहा कि उसने अप्रैल 2006 में 2.34 प्रति एमएमबीटीयू पर गैस बेचे जाने के बारे में अपना आवेदन सरकार को दिया था लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। कंपनी निरंतर यह कहती रही है कि वह सरकार के फार्मूले के मुताबिक गैस की बिक्री करने को बाध्य है।

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