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रूठ के हम से कहीं..

रूठ के हम से कहीं..

पिछले दिनों 6 वर्ष का बंटी घर से भाग गया। वह दिल्ली से ट्रेन में बैठा और सीधे देहरादून पहुंच गया। वहां पहुंच कर उसे घर की याद सताने लगी। तब उसने पुलिस अंकल को बताया कि वह अपने घर लौटना चाहता है। वैसे घर से भागने वाला बंटी बहुत होशियार बच्चा है। वह आसानी से किसी को भी अपना दोस्त बना लेता है। उसे फोटोग्राफी का भी शौक है। बंटी बड़ा होकर पुलिस ऑफिसर बनना चाहता है। दोस्तो, एक कहावत तो तुमने सुनी होगी कि सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। बंटी को बात समझ आई और वह लौट आया। अब शायद उसका सपना जरूर पूरा हो जाए।

बंटी जैसे बहुत से बच्चे घर से नाराज होकर भाग जते हैं। कोई कहता है कि उसे मम्मी डांटती हैं तो कोई कहता है कि पापा उससे नाराज रहते हैं। बंटी से भी जब पूछा गया कि वह घर से क्यों भागा तो उसने भी ऐसे ही कुछ कारण गिनाए।

जब खाना छोड़ने पर पड़ती है डांट
बंटी ने माना कि उसे अपना लंच छोड़ने पर हर रोज डांट पड़ती है। तुम में से कई बच्चे ऐसे होंगे, जो डाइनिंग टेबल पर बैठते ही खाने के लिए ना नुकुर शुरू कर देते हैं। तुम पढ़ते व देखते होंगे कि हमारे आसपास कितने ही बच्चे भूखे पेट ही सो जाते हैं। गरीबी में बसर कर रहे उन बच्चों को एक वक्त के खाने के लिए दूसरों की ओर देखना पड़ता है। तुम्हें खुद को खुशनसीब समझना चाहिए कि तुम्हारे माता-पिता इतने सक्षम हैं कि तुम्हें स्वच्छ भोजन मिलता है। तुम्हीं सोचो, जब तुम बीमार पड़ जते हो तो बहुत सी टैबलेट खानी पड़ती हैं। भोजन में मौजूद पोषक तत्व तुम्हारे संपूर्ण विकास के लिए जरूरी हैं। तुम्हारे मजबूत दांतों, आखों की रोशनी, मजबूत हड्डियों आदि के लिए प्रदूषित खाने से हमेशा बचना होता है। बड़े भी तुम्हें अक्सर यही हिदायतें देते हैं, जो तुम्हें अधिकतर बुरी लगती हैं। सोचो, क्या वे तुम्हारे लिए बुरा सोचते हैं? क्या हमेशा टिफिन में चिप्स व चाउमीन जसे फास्ट फूड की जिद करना जायज है?

पढ़ाई में पीछे हो तो..
जब भी तुम बच्चों की स्कूल डायरी खोलो तो उसमें टीचर के नोट दिखाई देते हैं। नोट में अगर तुम्हारे पेरेंट्स को तुम्हारी गिरती परफॉरमेंस के बारे में बताया जता है तो उन्हें दुख क्यों न हो, जब वे तुम्हारे पालन- पोषण में अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ते और तुम्हारी हर छोटी-बड़ी जरूरतों को चुटकी बजते ही पूरा कर देते हैं। जिन टीचर्स को तुम विलेन की तरह देखते हो, वे तुम्हारे भविष्य को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। तुम्हें हमेशा शिकायत रहती होगी कि वे तुम्हें डांटते हैं। जरा सोचो कि वे तुम्हें होमवर्क न करने पर क्यों डांटते हैं। होमवर्क इसीलिए कि स्कूल में पढ़ाए गए उस विषय को एक बार दोबारा अभ्यास कर सको। स्कूल में पढ़ाए गए विषय पर अच्छी पकड़ के लिए होमवर्क को किसी बोझ की तरह मत लो। अगर तुम्हें होमवर्क में कोई परेशानी आती है तो टीचर से बिना डरे खुल कर कहो कि कहां से तुम्हें समझ नहीं आया। फिर देखो तुम्हारी यह समस्या कहां छूमंतर हो जाती है। 

कहीं बुरी आदत तो कारण नहीं
बुरी आदतें अच्छे इंसान को भी बुरा बनाने में देर नहीं लगातीं। अच्छी आदतों को  सीखने में भले ही तुम्हें कुछ समय लग जाए, लेकिन बुरी आदतें बहुत जल्दी अपने दलदल में फंसा लेती हैं। कुछ बच्चों के स्कूल में ऐसे दोस्त बन जते हैं, जो पढ़ने-लिखने की बजए घूमने-फिरने में यकीन रखते हैं। कुछ बच्चे तो घर से पैसे चुराने में भी पीछे नहीं रहते। कुछ को बीड़ी-सिगरेट आदि पीने की बुरी लत लग जती है। तुम्हीं सोचो कि पकड़े जाने पर क्या डांट नहीं पड़नी चाहिए। कल तुम बड़े हो जओगे और तुम्हारा छोटा भाई सिगरेट पीते पकड़ा जएगा तो तुम जरूर दौड़ कर पापा को बताओगे। इसीलिए आज अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारी आदतें तुम्हें पड़ रही डांट का कारण हैं तो तुरंत उनसे छुटकारा पा लो।

टीवी से घंटों चिपके रहना
जयंत को टीवी देखने का शौक है। एक दिन अचानक उसके पापा ने उसे टीवी से चिपके हुए देखा तो जबरदस्त डांट पिलाई-एग्जाम का टाइम है और तुम टीवी देख रहे हो? उदास मन से जयंत थोड़ी देर के लिए अपने रूम में चला गया। किताबें पलटने लगा, पर उसका मन नहीं लग रहा था। वह सोचने लगा कि उसकी किसी को जरूरत नहीं है। थोड़ी देर अगर टीवी देख लेता तो पापा का क्या चला जाता।
पेरेंट्स मीटिंग में अन्य बच्चों की तारीफ होती थी, वहीं पढ़ाई में पिछड़ना जयंत के पापा के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। ऐसे में अगर उन्हें गुस्सा आ गया तो क्या जयंत को बुरा मानना चाहिए!  जयंत को पापा की चिंता को भी तो समझना चाहिए न। पिछले साल तक उसकी गिनती अव्वल बच्चों में होती थी। आखिर ऐसा क्या हो गया कि अंक हर परीक्षा में कम-कम होते चले गए। कहीं घंटों टीवी पर चिपके रहना भी तो एक कारण नहीं!

जब आने लगें शिकायतें
जहां तुम रोज क्रिकेट खेलते हो, उससे सामने वाले घरों के कांच के शीशे फूट सकते हैं। जानते-बूझते हुए तुम वहीं खेलते हो। स्कूल बंक करके फिल्म देखने सिनेमा हॉल चले जते हो, जबकि तुम जानते हो कि तुम्हारे अन्य साथी कक्षा में अपने-अपने विषय में मजबूत होते चले जएंगे। स्कूल हो या घर, जब भी तुम कोई खेल खेलते हो तो जल्दी ही झगड़ने लग जते हो। ऐसे में वे बच्चे या उनके पेरेंट्स शिकायतें लेकर तुम्हारे घर आते हैं। आज तुम सभी से यूं ही झगड़ते रहे तो एक दिन तुम्हारे साथ खेलने के  लिए कोई तैयार नहीं होगा। लगातार आ रही शिकायतों के बाद तुम्हारे पेरेंट्स से डांट पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में घर से भागना समस्या का हल नहीं है। तुम घर से भागना साहस समझते हो। इतना ही साहस अगर तुम अपनी तमाम बुराइयों से लड़ने व अपनी पढ़ाई में दिखाओगे तो तुम्हारे मन में घर से भागने का विचार कभी नहीं आएगा। आज तुम अपने माता-पिता से बच कर दूर तो जना चाहते हो, लेकिन जब कल तुम्हारा पराए लोगों से सामना होगा तब..। कोई तुम्हें चोर-लुटेरा बनाने के लिए दबाव बनाएगा तो कोई ढाबे में दिन-रात काम करवाएगा। तब तो तुम दूसरों का कहना जरूर मानोगे। क्या आज तुम अपनों की बात नहीं मान सकते?

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