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इंसान के घर जाता हूं, दलित के घर नहीं: राहुल

इंसान के घर जाता हूं, दलित के घर नहीं: राहुल

दलितों के घर जाने को राजनीतिक हथकंडा बताने से संबंधित विपक्षी दलों की आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि वह जाति व्यवस्था में विश्वास नहीं रखते और उनका उद्देश्य गरीब लोगों तक पहुंचना है।

राहुल ने संवाददाताओ से कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर जाति व्यवस्था में विश्वास नहीं करता, मैं किसी मनुष्य के घर में जाता हूं और किसी दलित के घर नहीं। उन्होंने कहा कि मीडिया ने दलितों के घर उनके दौरे को देखा है।

इसे दलितों के रूप में व्याख्या करना आपकी ओर से हुआ है, मेरी ओर से नहीं। मैंने अपने कार्यालय को सबसे गरीब गांव के गरीब व्यक्ति के घर जाने की व्यवस्था करने को कहा। राहुल ने कहा आप उसे दलित के रूप में देखते हैं, मैं उसे गरीब व्यक्ति के रूप में देखता हूं।

राहुल ने कहा कि मैंने एक चाय की दुकान चलाने वाले और एक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र से एक ही जगह मुलाकात की। मैंने चाय वाले से यह नहीं पूछा कि क्या वह दलित हैं। यहां अंतर प्राप्त अवसरों का है।

उन्होंने कहा कि वह भी आपकी तरह ही बुद्धिमान और तेज हैं, लेकिन उन्हें विश्वविद्यालय जाने का अवसर नहीं प्राप्त हुआ है। दोनों में यही एक अंतर है। एक प्रश्न के जवाब में कांग्रेस महासचिव ने कहा कि जिस दिन उनकी सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी उसी दिन मेरी मौत हो जायेगी। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने कहा कि वह बसपा प्रमुख के विरोध के बावजूद अपना कार्यक्रम जारी रखेंगे।

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