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दुनिया की एक तिहाई बालिका वधु भारत में: यूनीसेफ

दुनिया की एक तिहाई बालिका वधु भारत में: यूनीसेफ

दुनिया की एक तिहाई बालिका वधुएं भारत में हैं, जहां बड़ी संख्या में नवजात शिशुओं का पंजीकरण ही नहीं हो पाता है।

संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनीसेफ ने अपनी नयी रिपोर्ट प्रोग्रेस फोर चिल्ड्रन: ए रिपोर्ट कार्ड ऑन चाइल्ड प्रोटेक्शन में कहा गया है कि साक्षरता की दर बढ़ने और बाल विवाह पर कानूनी रोक होने के बावजूद भारत में धर्म तथा परंपराओं के चलते बाल विवाह प्रथा आज भी जारी है।

दक्षिण एशिया में दुनिया के किसी अन्य हिस्से के मुकाबले सर्वाधिक बाल विवाह होने को रेखांकित करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और नेपाल में सबसे अधिक बाल विवाह होते हैं जो दस फीसदी या उससे अधिक हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया की आधे से अधिक बालिका वधुएं दक्षिण एशिया में हैं और इसी क्षेत्र में आधे से अधिक नवजात शिशुओं के जन्म को पंजीबद्ध ही नहीं किया जाता। रिपोर्ट कहती है कि एक अनुमान के अनुसार, दक्षिण एशिया में वर्ष 2007 में 47 फीसदी बच्चों का जन्म के समय पंजीकरण नहीं किया गया और ऐसे दो करोड़ 40 लाख बच्चों में से दस लाख 60 हजार भारत से थे।

यूनीसेफ की प्रमुख एन्ना वेनमैन ने कहा यदि किसी समाज के इतने छोटे बच्चों का जबरन बाल विवाह, सेक्स वर्कर के तौर पर शोषण किया जाएगा और उन्हें मूल अधिकारों से वंचित किया जाएगा तो वह समाज तरक्की नहीं कर सकता।

वेनमैन ने कहा कि बच्चों के अधिकारों के हनन की गंभीरता को समझना एक पहला कदम है ताकि एक ऐसा माहौल बनाया जा सके जहां बच्चे सुरक्षित हों और अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करने में मदद मिल सके।

यूनीसेफ की बाल संरक्षण विभाग की प्रमुख सुसेन बिसेल ने कहा कि कार्रवाई के लिए आंकड़ों की जरूरत है। हम इस मामले में सुनिश्चित हो सकते हैं कि यदि हमारी कार्रवाई सबूतों पर आधारित है तो हम जो कर रहे हैं वह सही है।

बाल श्रम के संबंध में यूनीसेफ ने अनुमान व्यक्त किया है कि दुनियाभर में पांच से 14 साल की उम्र के 15 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी के दंश को झेल रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र के 13 फीसदी बच्चे यानि करीब चार करोड़ 40 लाख बाल श्रमिक हैं। इनमें से करीब तीन करोड़ बच्चे अकेले भारत में निवास करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आंकड़ों के आधार पर बाल मजदूरी की समाप्ति के लिए क्षेत्र आधारित नीतियां बनाना जरूरी है।

इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि बाल मजदूरी, वेश्यावृति और घरेलू कामकाज के लिए बहुत से नेपाली बच्चों का भारत में शोषण होता है और इसी मकसद से बहुत से पाकिस्तानी लड़के लड़कियों को मानव तस्करी के जरिए अफगानिस्तान ले जाया जाता है।

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