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करवाचौथ: आस्था को दें नये अर्थ

करवाचौथ: आस्था को दें नये अर्थ

पति पर पत्नी के विश्वास का पावन पर्व है-करवाचौथ। सदियों से चली आ रही इस आस्था का ही परिणाम है कि महिलाएं इस दिन अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन उपवास रखती हैं। वे पूरे दिन पानी तक नहीं पीतीं और रात को चांद देख कर ही अपना उपवास तोड़ती हैं। यह सब कुछ बड़े ही परंपरागत ढंग से होता है। आस्थाओं और विश्वास से भरा यह दिन गुजर जाता है और उसके बाद जीवन अपनी रूटीन पटरी पर लौट आता है। वही पति के साथ चिकचिक, संवादहीनता की स्थितियां, एक-दूसरे पर दोषारोपण, काम के तनाव, शिकवों और शिकायतों का ढेर! महज एक दिन के बाद ही महिलाएं और पुरुष करवाचौथ को भूल जाते हैं। फिर भी महिलाएं करवाचौथ का उपवास रखना अपना परम धर्म समझती हैं। उनके भीतर इस बात का डर बैठा हुआ है कि कहीं उनके उपवास न रखने से उनके पति को कोई नुकसान न हो जए-लिहाज वे उपवास रखती है और संभवत: आगे भी रखती रहेंगी। जितनी बड़ी संख्या में भारत में स्त्रियां करवाचौथ का और पति, बच्चों और घर की सुख-शांति के लिए अन्य उपवास रखती हैं, उससे तो यह लगता है कि भारत में पति-पत्नी के रिश्ते सबसे सुदृढ़ होने चाहिए। लेकिन क्या ऐसा है? पति-पत्नी के रिश्तों की जो तस्वीर बनती है, वह बताती है कि आज इस रिश्ते में जितनी दूरियां और अलगाव आ गया है, उतना पहले कभी नहीं रहा। यह अकारण नहीं है कि भारत में तलाक, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हम या तो रिश्तों को ढो रहे हैं या दिनों को धक्के दे रहे हैं, जहिर है यह चीजों का सामान्यीकरण नहीं है। लेकिन कमोबेश यही स्थितियां हैं। तो क्या किया जाए? क्या इसी तरह चलने दिया जाए-अलग-अलग पगडंडियों पर चलते हुए ही दिन गुजरे जाएं और उसके बाद महिलाओं को करवाचौथ का व्रत रखते देखा जाए और इस बात पर खुश हुआ जाए कि चलो और कुछ नहीं तो पत्नी आपकी लंबी उम्र के लिए व्रत तो रख ही रही है?

क्यों न इस बार करवाचौथ का एजेंडा कुछ इस तरह हो कि पति-पत्नी के रिश्तों की गर्माहट भी लौटे और लंबी उम्र की बजय हम जिंदगी को बेहतर तरीके से जीना भी सीखें? यहां हम पति पत्नी को कुछ ऐसे टिप्स दे रहे हैं, जिनके प्रयोग से पति पत्नी के रिश्तों की गर्माहट तो लौटेगी ही, साथ ही जीवन और इस रिश्ते को नये अर्थ मिलेंगे।

दोनों एक-दूसरे को पार्टनर समझें
आमतौर पर पति-पत्नी के बीच बॉस और कर्मचारी का-सा रिश्ता बन जता है। पत्नी भी पति को बॉस समझती है और पति तो खुद को बॉस समझता ही है। पत्नी को लगता है कि उसे अपने बॉस (पति) को हर हाल में खुश रखना है। वह अपनी खुशियों और अपनी संतुष्टि को अक्सर भूल जया करती है। पुरुषों के भीतर बैठा यही बॉस अक्सर उन्हें पत्नी से ‘हार्श’ बोलने पर मजबूर कर देता है। सबसे पहले इस स्थिति को दूर करें और एक-दूसरे को पार्टनर समङों। तभी आपका दांपत्य खुशहाल हो सकता है।

कोई भी फैसला दोनों मिल कर लें
अक्सर घर और बाहर से जुड़े अधिकांश फैसले पुरुष ही करते हैं। कोशिश करें कि मसला चाहे छोटा हो या बड़ा, कोई भी निर्णय दोनों-पति-पत्नी मिल कर ही लें। इससे एक और जहां पत्नी को बेहद खुशी होगी, वहीं पति को भी यह अच्छा लगेगा कि पत्नी हर काम और फैसले में उसकी भागीदार है।

पति-पत्नी की बजाय दोस्त बनें
आमतौर पर यह देखा जता है कि जब तक लड़का-लड़की एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, तब तक दोनों के रिश्ते ठीक रहते हैं, लेकिन शादी के बाद अचानक रिश्ते में बदलाव आने लगता है। लड़के की शिकायत होती है कि उसकी पत्नी (पूर्व प्रेमिका) अचानक घरेलू औरत में बदल गयी है, जबकि वह उसके भीतर अपनी प्रेमिका को ही तलाशता रहता है। यही बात दोनों को एक-दूसरे से दूर ले जती है। यह बात महिलाओं को भी समझनी चाहिए और कभी-कभी उन्हें पत्नियों की बजाय प्रेमिका और दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए।

एक-दूसरे की तारीफ करने की आदत डालें
पति-पत्नी अक्सर एक-दूसरे की तारीफ करने से बचते हैं। अगर पति कोई अच्छा काम करता है तो पत्नी को लगता है कि यह तो उसका फर्ज है। इसी तरह यदि पत्नी कोई अच्छा काम करती है तो पति उसकी तारीफ करने से बचता है, जबकि मानव व्यवहार भी यही कहता है कि एक-दूसरे की तारीफ करने से दोनों की आपस में मधुरता बढ़ती है।

खुद को अपडेट करें
आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। महिलाएं और पुरुष कई बार यह मान कर चलते हैं कि अब जीवन में कुछ नया नहीं होना है, इसलिए वे पुराने संस्कारों और पुरानी तकनीक के साथ ही आगे बढ़ते हैं और यदि इनमें से एक पार्टनर आधुनिक होने लगता है तो भी रिश्ते में दरार पड़ने लगती है, इसलिए नयी और इनोवेटिव चीजों को सीखते रहें। इससे आप युवा भी रहेंगे और आपके रिश्ते की उम्र भी लंबी होगी।

संवाद बनाए रखें
कई बार छोटे-छोटे झगड़ों के कारण पति-पत्नी के बीच संवादहीनता की स्थिति आ जाती है। पति-पत्नी दोनों ही सोचते रहते हैं कि वह क्यों संवाद शुरू करे। इसका परिणाम यह होता है कि घर में खामोशी पसरी रहती है और पति-पत्नी दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं, इसलिए बेहतर यही है कि आपसी संवाद को कभी खत्म न होने दें-चाहें आपस में लड़ाई ही क्यों न हो।

एक-दूसरे से चैट करें
एक-दूसरे को समय न देना महानगरों की सबसे बड़ी समस्या है। उस स्थिति में तो यह और भी मुश्किल हो जता है, जब पति-पत्नी दोनों काम करते हैं। मजेदार बात यह है कि इस स्थिति में पति नेट पर किसी से चैटिंग करता है तो पत्नी किसी और से। आपसी रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए और एक दूसरे को समय न दे पाने की कमी पति-पत्नी नेट पर एक दूसरे से चैट करके पूरी कर सकते हैं।

एक-दूसरे के लिए खुद को बदलें
कई बार पति एक तरह की सोच का होता है और पत्नी दूसरी सोच की और दोनों ही एक-दूसरे के लिए बदलने को तैयार नहीं होते। इस स्थिति को बदलें और कोशिश करें कि एक दूसरे की रुचियों के अनुरूप बना जए। मिसाल के तौर पर पति को बाहर घूमने का शौक है तो पत्नी को भी उसके इस शौक को पूरा करने में सहयोग देना चाहिए और यदि पत्नी को शॉपिंग करना पसंद है तो पति को चाहिए कि वह पत्नी को शॉपिंग पर ले जाने में कोई गुरेज न करे।

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