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दो टूक (07 अक्तूबर, 2009)

दिल्ली में मेट्रो रेल के फायदों की झड़ी लगनी शुरू हो गई है। सीआरआरआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रो के आने से सड़कों पर गाड़ियां कम हुई हैं। यही नहीं, खर्चीली कही जाने वाली मेट्रो बेहद तेजी से अपना खर्चा पटा रही है।

यह सफलता उन सभी को हौसला देती है, जो बेहतर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की हिमायत करते रहे हैं। आज निजी वाहन जहां दिल्ली के लिए कैंसर बन चुके हैं, वहीं मेट्रो हर लिहाज से राजधानी की जान साबित हुई है। यह उन दलीलों का करारा जवाब भी है जो हर मर्ज का इलाज निजीकरण में खोजते हैं। हमारे सरकारी स्कूल और अस्पताल भी अगर मेट्रो की तरह काम करने लगें तो देश का कायाकल्प होने में देर नहीं लगेगी।

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  • Web Title:दो टूक (07 अक्तूबर, 2009)