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डायबिटीज से जुड़े मिथक और सच्चाई

मधुमेह रोग देश में महामारी के रूप में बढ़ रहा है। हालांकि यह बहुत पुराना रोग है, इसका वर्णन लगभग 2500 वर्ष पूर्व महान भारतीय चिकित्सक चरक ने भी किया था। इन मरीजों में इन्सुलिन हार्मोन प्रभावित न होने या इसके ऊतकों पर निष्प्रभावी होने के कारण ग्लूकोज कोशिकाओं के अन्दर प्रवेश नहीं कर पाता, रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही शरीर की अनेक अन्य जैव रसायनिक प्रक्रियाएं असंतुलित हो जाती हैं। रोग सामान्य होने और पुराने समय से होने के कारण जनसामान्य में रोग के प्रति अनेक मिथ्या धारणाएं बन गई हैं। इनके कारण मरीज जाने-अनजाने रोग पर कड़ाई से नियन्त्रण नहीं रख पाते, जिसके कई बार गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

मधुमेह किसी भी आयु में
धारणा है कि यह 40 साल की उम्र के बाद होता है।  बच्चों, युवाओं में नहीं होता। पर सच्चाई यह है कि बचपन में होने वाला रोग वयस्कों के रोग से भिन्न होता है। यह बच्चो प्राय: दुबले होते हैं, रोग पर नियन्त्रण सिर्फ इन्सुलिन के नियमित इन्जेक्शन द्वारा हो सकता है। वयस्कों में टाइप-2 मधुमेह के अधिकांश मरीजों का वजन सामान्य से ज्यादा होता है। पर दुबले दिखने वाले वयस्क भी कभी-कभी इस रोग की चपेट में आ सकते हैं।

टाइप-2 मधुमेह के ज्यादातर मरीजों में रोग पर नियन्त्रण जीवन शैली में बदलाव कर तथा आवश्यकता होने पर गोलियों के सेवन द्वारा हो सकता है। गंभीर रोग होने पर कुछ जटिलताएं होने पर ही इन्सुलिन के इन्जेक्शन जरूरी होते हैं।

मधुमेह जीवन पर्यन्त का रोग है क्योंकि अभी तक इसका स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है। अत: दवाइयों, इन्सुलिन के इन्जेक्शन से छुटकारा पाने, बदपरहेजी करने के गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं।

मोटापा ही अकेला कारण नहीं
आम धारणा है कि मधुमेह मोटापे के कारण होता है, हर मोटे व्यक्ति, मधुमेह ग्रस्त नहीं होते, पर इनके मधुमेहग्रस्त होने की संभावना जरूर ज्यादा होती है। वजन सामान्य बनाए रखने से रोग से कुछ हद तक बचाव संभव है.

-बड़े-बुजुर्ग कहते हैं, ‘ज्यादा चीनी, मिठाई खाते हो मधुमेह रोग हो जाएगा।’ रोग इनके कारण नहीं होता, पर रोग ग्रस्त होने पर इन पर कड़ाई से नियन्त्रण आवश्यक है।

-नीम हकीम डाक्टर, जनसाधारण, यहां तक पुराने विचारों के डॉक्टर मधुमेह के मरीजों को चीनी, चावल, आलू न खाने की सलाह देते हैं। आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि इनको नियमित रूप से नियत मात्र में भोजन में लेना  चाहिए, जिसमें कैलोरी की मात्र जरूरत के मुताबिक हो। इनको वसा-घी, तेल, तले भोज्य पदार्थो का सेवन कम से कम करना चाहिए। यह जटिल शर्करा प्रचुर मात्र में सेवन कर सकते हैं। सरल शर्करा चीनी, गुड़, शहद का सेवन यदाकदा सीमित मात्र में करें। यदि इनको मिठाई खाने की इच्छा है तो अवश्य खा लें, पर भोजन में उतनी कैलोरीयुक्त अन्य भोज्य पदार्थ की मात्र कम सेवन करें।

-मरीज समझते हैं कि पेशाब में ग्लूकोज न आने का अर्थ है, वह रोग मुक्त हो गये हैं। रोग के नियन्त्रण का मापदण्ड रक्त ग्लूकोज स्तर होता है, न कि पेशाब में ग्लूकोज। अत: नियमित रूप से रक्त ग्लूकोज की माप स्वयं ग्लूको मीटर से करें या लैब से करवाए।

-आम धारणा है कि मधुमेह के मरीज चीनी के स्थान पर शहद, गुड़ मनमर्जी मात्र में सेवन कर सकते हैं। सच यह है कि यह भी सरल शर्करा और फॉस्ट सुगर है, इनका सेवन भी मरीजों के लिए कतई उचित नहीं है।

-पुराने समय में मान्यता थी कि मधुमेह के मरीजों को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। पर आधुनिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि इनको सक्रिय रहना चाहिए और मध्यम तीव्रता के 30-40 मिनट व्यायाम कम से कम सप्ताह में 4 दिन करना आवश्यक है, जिससे वजन नियन्त्रित रहता है, रक्त ग्लूकोज पर बेहतर नियन्त्रण होता है, जटिलताएं देरी से शुरू होकर मंद गति से होती हैं। पर व्यायाम करते समय इनको दवा, इन्सुलिन और भोजन की मात्र में समुचित तालमेल रखना चाहिए। व्यायाम करने से रक्त ग्लूकोज स्तर कम होने के कारण चक्कर, पसीना आना, घबराहट, कमजोरी इत्यादि समस्याएं होने पर व्यायाम रोक कर ग्लूकोज सरल शर्करायुक्त भोज्य पदार्थो का तुरन्त सेवन करना चाहिए।

-कुछ मरीज समझते हैं कि मिठाई खाने के बाद यदि कडुए भोज्य पदार्थ सेवन कर लें तो मिठाई खाने के दुष्परिणाम नहीं होंगे, यह धारणा भी भ्रामक है। इन दोनों बातों का मधुमेह के प्रभाव से सीधा कोई सम्बंध नहीं।

-कुछ मरीज, मनमर्जी मात्र में गरिष्ठ भोजन करने के बाद, दवाई की मात्र बढ़ा देते हैं या उपवास करते हैं, यह दोनों ही चीजों के गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। यदि जरूरत से ज्यादा भोजन सेवन कर लिया है तो बेहतर है, ज्यादा देर तक व्यायाम कर अतिरिक्त कैलोरी को खर्च करें। इनको पूर्ण उपवास कतई नहीं करना चाहिए।

-यदि मीठा खाने का शौक है तो यह सुगर फ्री, सैक्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ मरीज इनका इस्तेमाल इनके हानिप्रद होने के कारण नहीं करते। पर शोधों से इनके हानिप्रद प्रभाव का पता नहीं लगा है। मधुमेह ग्रस्त होने पर चिंता व तनावग्रस्त न हों, बस जीवन शैली में अपेक्षित बदलाव लाकर, सक्रिय रह कर नियमित व्यायाम कर, नियमित दवाओं/इन्सुलिन का इस्तेमाल कर यह सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। रक्त ग्लूकोज स्तर पर कड़ाई से नियन्त्रण करने से जटिलताएं नहीं होती, या देरी से शुरू होकर मंदगति से होती हैं। अभी रोग से स्थायी निजात की आशा न करें। किसी के बहकावे में न आएं।

एक बार रोग ग्रस्त होने पर जीवन शैली, आदतों, भोजन में बदलाव तथा जरूरी होने पर दवाओं का सेवन शेष जीवन पर्यन्त करना पड़ता है, साथ ही नियमित रूप से चिकित्सक से परीक्षण और आवश्यक जांचें करवानी चाहिए, जिससे रोग के नियन्त्रण और इसके कारण होने वाली जटिलताओं का शुरुआती अवस्था भी पता लग सके।

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