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चाहाँ बइठल हईं उहाँ से कोई हटा नाहीं सकेला

‘एही ठइयाँ मोतिया हेरा गईल हो रामा, कहवाँ मैं ढूँढूँ.।’ पक्की गायकी के यह बोल पद्मविभूषण श्रीमती गिरिाा देवी की खनकती आवाज की चाशनी में लिपट कर संगीत रसिकों के दिलों में बार- बार दस्तक दे चुके हैं। सुर की इस मलिका को राजनीति से कोई सरोकार नहीं है, लेकिन सियासत के बदले हालात और तौर-तरीकों का एहसास उन्हें बखूबी है। ‘हिन्दुस्तान’ ने बनारस घराने के शीर्ष शास्त्रीय गायक पं.राजन-साजन मिश्र के बाद वर्तमान राजनीति पर अप्पाजी (शिष्यों द्वारा पुकारा जाने वाला नाम) को कुरदा तो यही बात सामने आई।ड्ढr बनारसी गायकी के साथ सभ्यता, संस्कृति, अंदाज, रहन-सहन और ठेठ बोली को आत्मसात किए अप्पाजी से उनके संजय गांधी नगर कॉलोनी स्थित आवास पर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। उनके क्षेत्र से दीगर राजनीति पर बात चली तो उन्हें कुछ अटपटा लगा फिर चिर-परिचत अंदाा में बोलीं- ‘कुच्छो हो जाए हम जहाँ बइठल हईं उहाँ से कोई हटा नाहीं सकेला। मगर नेतवन तऽ पाँचै साल में आवत-ाात रहेलन।’ जब पूछा गया कि पीएम की कुर्सी मिल जाए तो आप क्या करंगी? मुँह में पान की गिलौरी दबाए एक बार तो खिलखिलाकर हँसीं फिर तपाक से कहा- ‘ए भइया, प्रधानमंत्री बनले पर तऽ हम चुप हो जाब।’ स्टार सांसदों के बार में उन्होंने कहा कि ‘वैजयंतीमाला, हेमामालिनी, जया बच्चन, गोविंदा अउर कई जने संसद में खाली कुर्सी शोभा बढ़ावे बदे जालन। ऊ सब बतावें जनता बदे का-का काम कइलन। वइसे भी कोऊ नृप होय हमें का हानि।’ड्ढr एक सवाल पर वह गंभीर हो गईं, कहा कि ‘अब तऽ भगवाने देश के बचावत हउवन। पता नाहीं के कहाँ से टपक पड़ी।’ इसके बाद भोजपुरी में खड़ी बोली मिक्स करते हुए कहा पुरानेोमाने में कांग्रेस और जनसंघ आदि कुछ ही गिनी-चुनी पार्टियाँ थीं। लोग नेताओं पर भरोसा करते थे। नेता भी काम के सच्चे और बात के पक्के थे। आज मतिन एतना धींगामुश्ती नाहीं रहल। इतने अधिक राजनीतिक दल हो गए हैं कि वोट माँगने के लिए होड़ मची है। चुनावों में पैसे के साथ डर भी शामिल हो गया है। जनता के लिए मुश्किल है कि वह किस पर भरोसा कर। दुखद यह है कि मतदान के दिन तमाम लोग वोट डालने नहीं जाते। वर्षो पूर्व कई नेताओं द्वारा एमपी बनाए जाने का आग्रह ठुकरा चुकीं गिरिाा देवी ने कहा कि हम्में राजनीति से का लेना-देना। संगीत के क्षेत्र में आज हम जहाँ बइठल हईं उहाँ से कोई हटा नाहीं सकेला।..हम्में सोनिया गांधी भी पहिचानेलिन और अटल बिहारी वाजपेयी भी। कई बड़का नेता चिन्हेलन। लेकिन हम कब्बो एमपी बदे नाहीं सोचली। हम्में अपने संगीत से मतलब हव। गिरिाा देवी वर्तमान में ‘भारतरत्न’ सम्मान के लिए उस्ताद अब्दुल रशिद खाँ साहब, उस्ताद अली अकबर खाँ साहब और गंगूबाई हंगल को उपयुक्त मानती हैं।ं

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