DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वोट के लिए हुड्डा की उपलब्धियां गिना रहे संपत

यह राजनीति का ही रंग है कि कुछ महीने पहले तक हर मौके पर हुड्डा सरकार की बखिया उधेड़ने वाले सम्पत सिंह आज उसी की उपलब्धियों की छांव तले विधानसभा का रास्ता तलाश रहे हैं। जिन्हें वे फर्ज़ी और बकवास बताया करते थे आज उन्हीं उपलब्धियों को गिनवा कर वोट मांगते फिर रहे हैं।

इस नए बने विधान सभा क्षेत्र का यह पहला चुनाव है जहां हाल में इनेलो से कांग्रेस में शामिल हुए प्रो. सम्पत सिंह का मुकाबला हरियाणा जनहित कांग्रेस के सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई की मां जसमां देवी से है। हजकां उम्मीदवार जहां एक घरेलू महिला होने के अलावा अपने जीवन का दूसरा चुनाव लड़ रहीं हैं वहीं सम्पत सिंह चुनावी राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। इस बात में दोनों समान हैं कि उनके लिए यह नया इलाका है।

आज के हालात में इन दोनों में से किसी को भी दूसरे से आगे नहीं बताया जा सकता। यूं तो सम्पत का यहां खुद का कोई बड़ा आधार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जनसमर्थन मिल रहा है। कारण वे खुद नहीं बल्कि उनकी पार्टी है जिसका दामन उन्होंने अभी हाल में इनेलो छोड़ कर थामा है। बोलने और व्यवहार में शालीन प्रो. सिंह एक अच्छे वक्ता भी हैं और प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा भी। 

दूसरी ओर जसमां देवी का राजनीतिक वजूद हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई के कारण नहीं है। इस संवाददाता ने नलवा तथा बालावास में जब भी लोगों से हजकां प्रत्याशी के बारे में बात की तो किसी ने भी उन्हें कुलदीप की मां संबोधित नहीं किया। लोग उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल की पत्नी के रूप में जानते हैं। इसका कारण यह है कि अभी तक न तो हजकां और न ही उसके सुप्रीमो का कोई रिकार्ड जनता के सामने है जिसके बल पर वे उन्हें पहचान सकें।

जसमां देवी की जो भी राजनीतिक पूंजी कही जा सकती वह है भजन लाल और उनके काम हैं। दूसरा जो फायदा उन्हें मिल रहा है और जिसे देखते हुए ही उन्हें खड़ा किया गया वह है आदमपुर हलके के कुछ गांव जो नलवा में शामिल किए गए हैं। आदमपुर भजन लाल का ऐसा अभेद्य दुर्ग है जिसमें पिछले चालिस-पैंतालिस वर्षो में आज तक कोई सेंध नहीं लगा सका। हजकां को आशा है इन गांवों के अस्सी-पच्चासी फीसदी वोट उसे मिलेंगे जो बाकी जगहों की कमी को पूरा कर देंगे।

जसमां देवी को जिस बात की आशा है सम्पत सिंह को उसी की आशंका है इस लिए वे अपनी ओर से किसी भी मिल सकने वाली मदद को हथियाने से गुरेज़ नहीं कर रहे। इस मामले में सासंद नवीन जिंदल परिवार का ज़िक्र करना ज़रूरी है। नलवा उनका गांव है। यहां के लोग उनका खासा गुणगान करते हैं। पंच रमेश कहते हैं कि हम तो सिर्फ जिन्दल परिवार को जानते हैं और सारा गांव उनके अनुसार ही वोट करेगा।

देवी लाल धानक बताते हैं कि उनके कच्चे घर को पक्का बनाने के लिए 45 हज़ार रुपए जिन्दल की वजह से ही मिले। इस अंध-समर्थन का कारण यह है कि यहां के तमाम लोग जिन्दल की फैक्ट्रियों में नौकरियां पाए हुए हैं। ट्रक ड्राईवर दयानन्द दहिया कहते हैं नवीन जिन्दल और उनकी मां तथा निवर्तमान मन्त्री सावित्री जिन्दल ने नलवा में कालेज, आईटीआई, अस्पताल, हाई स्कूल तथा लड़कियों के लिए स्कूल बनवाए हैं तो फिर लोग उनकी बात क्यों नहीं मानेंगे?

इन दोनों गांवों के लोग जहां कई मायनो में संतुष्ट दिखाई देते हैं और कांग्रेस का दम भरते हैं वहीं उन्हें इस बात की शिकायत भी है कि सरकारी घोषणा को इतना वक्त गुज़र जाने के बावजूद दोनों गांवों के किसी भी व्यक्ति को सौ गज़ का मुफ्त प्लाट अभी तक नहीं मिला है। इनका कहना है कि मुख्य मन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने ऐलान किया था कि जिस गांव में ज़मीन नहीं भी होगी वहां सरकार ज़मीन खरीद कर लोगों को प्लाट देगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वोट के लिए हुड्डा की उपलब्धियां गिना रहे संपत