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रायबरेली में नरेगा में महिलाओं को काम नहीं

विकास खंड सतांव का गाँव बरउवा। सीडीओ को नरेगा के तहत चलते तीन कामों में एक भी महिला श्रमिक कार्यरत नहीं मिली। खीरों विकास क्षेत्र के डुमटहर गाँव में नरेगा के कार्यस्थल पर महिलाओं की जगह पुरुष पानी पिलाते मिले। रोहनिया विकास खंड के रायपुर गाँव में नरेगा का कोई काम ही नहीं चलता पाया गया।

रायबरेली में नरेगा की यह बदतर तस्वीर मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ द्वारा गाँवों में किए जा रहे निरीक्षण और सोशल ऑडिट से बाहर निकल कर आई है। कहीं काम ही नहीं हो रहे और जहाँ चल भी रहे हैं, वहाँ महिलाओं की भागीदारी नहीं। राज्य शासन के नरेगा की गाइड लाइन के पालन पर जोर का भी असर कर्मचारियों पर नहीं दिख रहा। मनमाने कामों के चलते पिस रहीं हैं महिलाएँ।

10 सितंबर को बरउवा गाँव में सोशल ऑडिट करने पहुँचे सीडीओ को नरेगा में तीन काम चलते तो मिले, लेकिन किसी में भी महिला श्रमिक काम करते ही नहीं मिली, तो सीडीओ खुद आश्चर्यचकित रह गए। उन्होने निरीक्षण आख्या में साफ-साफ लिखा-‘तीनों कार्यो में महिल श्रमिकों की भागीदारी न होना आपत्तिजनक है।

’ इसी विकास खंड के बरदर गाँव में सीडीओ को चार काम चलते मिले, लेकिन पानी पिलाने के काम में महिला की जगह पुरुष श्रमिक लगा हुआ था। इस स्थिति ने भी सीडीओ को चौंकाया। उन्होने लिखा कि नरेगा में कराए जा रहे कार्यों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा। यह स्थिति अत्यंत खेदजनक है।

नरेगा की गाइड लाइन में ही साफ-साफ लिखा है कि रोजगार से जुड़े इस कानून के तहत स्वीकृत योजनाओं में 30 प्रतिशत महिलाओं को अनिवार्य रूप से काम दिया जाए, लेकिन नरेगा के जिले में तैयार आँकड़े ही कह रहे हैं कि महज 20 फीसदी महिलाओं को ही नरेगा में रोजगार मिल पाया है। सितंबर तक की तैयार रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष एक लाख एक हजार 710 श्रमिकों को नरेगा से रोजगार उपलब्ध कराया गया। इसमें 19,833 महिलाएँ हैं।

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  • Web Title:रायबरेली में नरेगा में महिलाओं को काम नहीं