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नए साल में ऊर्जा प्रदेश रहेगा अंधेरे में

नए साल में ऊर्जा प्रदेश में भारी बिजली संकट का खतरा मंडरा रहा है। यदि जनवरी-फरवरी के लिए अभी से कहीं बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी तो दस से 12 घंटे कटौती करनी पड़ सकती है। मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुचारू रखना जंग की तरह हो गया है। बिजली जुटाने में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के हाथ-पांव फूल गए हैं। सर्दियों में वैसे भी प्रदेश का विद्युत उत्पादन न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाता है।

पिछले साल गर्मियों में उत्तराखंड ने 35 करोड़ यूनिट बिजली की बैंकिंग की थी। सर्दियों में इस बिजली का उपयोग करने के अलावा 15 करोड़ यूनिट बिजली अतिरिक्त रूप से दिल्ली से ली गई। इस बार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। दिल्ली ने साफ तौर से कह दिया है कि वह जनवरी-फरवरी में बिजली नहीं दे पाएगा। इस तरह आगामी सर्दियों में लगभग 50 करोड़ यूनिट बिजली की कमी होगी। इस कमी को पूरा करना प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती हो गई है।

तो सर्दियों में बिजली आपूर्ति सुचारू रखना काफी मुश्किल हो जाएगा। हालांकि कारपोरेशन स्तर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली ने उत्तराखंड को थोड़ी-बहुत बिजली देने पर सहमति जताई है लेकिन वह केवल नवंबर व दिसंबर में ही बिजली देगा। पावर कारपोरेशन द्वारा मांगे गए बिजली खरीद के टेंडर में सामने आई कंपनियां भी जनवरी में बिजली देने को तैयार नहीं हैं।

ऐसे में अब यूपीसीएल दोबारा टेंडर निकालने जा रहा है, लेकिन यदि इसके माध्यम से बिजली नहीं मिली तो सर्दियों में ऊर्जा प्रदेश की हालत खराब हो जाएगी। पिछले वर्ष की तुलना में प्रदेश के विद्युत उत्पादन में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। कारपोरेशन के अनुमान के मुताबिक सर्दियों में प्रतिदिन ढाई करोड़ यूनिट से अधिक बिजली की डिमांड होगी, जबकि उत्पादन एक करोड़ के आसपास हो सकेगा। उत्तरी ग्रिड से ओवर ड्रा के मामले में नार्दन रीजनल पावर कमेटी पहले ही उत्तराखंड को चेतावनी दे चुकी है कि अधिक ओवर ड्रा करने की स्थिति में प्रदेश की बिजली काटी जा सकती है।

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