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बीमार सहकारिता का होगा इलाज

प्रदेश में खस्ताहाल होते जा रहे सहकारिता के ढांचे को उबारने के प्रयास शुरू होने लगे हैं। केंद्र पोषित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के माध्यम से फैक्स समेत सहकारी बैंकों को आर्थिक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है। जिले के खाते में अभी तक एक करोड़ 88 लाख की राशि आयी है। पांच सालों की इस योजना में जिले को 7 करोड़ पचास लाख 38 हजार की धनराशि मिलेगी।  यदि अब ईमानदारी से प्रयास किए गए तो प्रदेश में सहकारिता का ढांचा मजबूत हो सकता है।

प्रदेश में सहकारिता अपने लक्ष्य से भटक गयी है, जिसके चलते प्रदेश की अधिकांश सहकारी समितियां या तो बंद हो चुकी हैं या फिर बंदी के कगार पर पहुंच गयी हैं। अकेले पौड़ी जिले में 30 फीसदी प्रारंभिक सहकारी समितियां निष्क्रिय पड़ी हैं तो 103 औद्योगिक सहकारी सीमितियां ठप हैं। समितियों की स्थिति बदहाल होने के बाद प्रदेश में सहकारिता का अभियान तेजी से सिमटता जा रहा था, लेकिन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से सहकारी समितियों के दिन बहुरने की उम्मीद दिखायी दे रही है।

एनसीडीसी ने वित्तीय वर्ष 2007-08 से एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के जरिए प्रदेश की सहकारी समितियों की तस्वीर बदलने की मुहिम शुरू की है। यह योजना केंद्र सरकार की है। इस योजना के तहत मिलने वाले धन का 90 फीसदी केंद्र सरकार देगी तो महज 10 फीसदी ही प्रदेश सरकार को खर्च करनी होगी।  योजना पांच सालों तक चलेगी।

सहकारी सीमितियों को मिलने वाली धनराशि का 50 फीसदी ऋण, 30 फीसदी माजिर्न मनी और 20 फीसदी अनुदान के रूप में होगा। योजना के तहत मिलने वाली धनराशि का उपयोग समितियां अपनी ऋण सीमा बढ़ाने समेत अन्य ऐसे कार्यों के लिए कर सकती है, जिससे उनका आर्थिक ढांचा मजबूत हो। पंच वर्षीय इस योजना के तहत पौड़ी जिले के लिए 7 करोड़ 50 लाख की धनराशि निर्धारित की गयी है। जिले को एक करोड़ 88 लाख 66 हजार रुपये की किश्त मिल भी गयी है।

अपर जिला सहकारी अधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी के अनुसार पहली किश्त में मिली धनराशि का आवंटन कर दिया गया है। जिला सहकारी बैंक को 50 लाख की माजिर्न मनी और साढ़े सात लाख रुपये मुख्यालय के सौंदर्यीकरण के लिए दिए गए हैं। इसके अलावा गढ़वाल मंडल बहुउद्देशीय सहकारी समिति को 2.50 लाख, डीसीडीएफ को 5 लाख, क्रय - विक्रय समितियों को 5-5 लाख और 124 प्रारंभिक सहकारी समितियों (पैक्स) को 63 लाख दिए जा चुके हैं। इसके अलावा परियोजना के प्रबंधन में 12 लाख 4 हजार का व्यय हुआ है।

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