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अवैध कॉलोनियां, कौन है जिम्मेदार

जब इनको बसाया ही नहीं जा सकता है तो इन कॉलोनियों को बिजली भी मिल जाती है। पानी की भी सप्लाई होने लगती है और सभी सुविधाएं मुहैया हो जाती है। इसके पीछे प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार है। भू-माफियाओं के इस खेल में उसकी आंखों पर पट्टी बंध जाती है। वहीं जीडीए ने इन कॉलोनियों को अवैध की लिस्ट में डाल कर अपना काम पूरा कर लिया है। जीडीए की फाइलों में 206 कॉलोनियां अवैध की श्रेणी में है। इसमें पावर कारपोरेशन के डिस्ट्रीब्यूशन का भी सहयोग है। जब इन कॉलोनियों को अवैध घोषित किया जा चुका है,तो इनको कनेक्शन कैसे दे दिया जाता है। वहीं पाईप लाइन और सीवेज की भी व्यवस्था यहां पर हो जाती है। सरकारी मशीनरी का सहयोग और लोगों की मजबूरी दोनों का फायदा उठा कर भू-माफिया कॉलोनियां काट कर फलते-फूलते जा रहे हैं। वहीं लोगों के ऊपर से गुजर रही लाइन किसी भी समय कहर बन कर टूट जाती है।

पावर कारपोरेशन का रोल
आर.पी.सिंह (एस.ई.ट्रांसमिशन) ने बताया कि 11 और 33 केवी की लाइनों की देखरेख का जिम्मा  डिस्ट्रीब्यूशन के हाथ में होता है। जबकि इसे ऊपर की क्षमता की लाइनों की देखभाल ट्रांसमिशन करता है। शहर में दौड़ रही 11 और 33 केवी की लाइने जर्जर हो चुकी हैं। जिसकी वजह से अक्सर ही टूट कर नीचे गिर जाती है। जिससे हादसे हो जाते हैं। इन लाइनों को बदलने का कार्य धीमी गति से होने की वजह से ढांचे में ही खोट है। बिजली के तार के नीचे घर बनने की पूरी लिस्ट पावर कारपोरेशन प्रशासन को दे चुका है। इसके साथ ही इन इलाकों और मकानों की फोटोग्राफी करा कर भी दी गई है। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन क्या कहता है
एडीएम(सिटी) एस.के.श्रीवास्तव का कहना है कि बिजली की लाइनों के नीचे मकान बनाना पूरी तरह गलत है। जब भी पावर कारपोरेशन ऐसी शिकायत करता है ,तो जीडीए को इन घरों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए जाते हैं।

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