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पूर्वाचल विश्वविद्यालय को 3.62 करोड़ का घाटा

वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय प्रशासन की अदूरदर्शिता के कारण विश्वविद्यालय में संचालित रोजगारपरक पाठ्यक्रम लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पिछले वर्ष इंजीनियरिंग व इस वर्ष एमबीए में प्रवेश न लेने से विश्वविद्यालय को 3.62 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

चालू सत्र में एमबीए के तीन विषयों में 180 सीटों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रवेश नहीं लिया जिससे लगभग एक करोड़ 62 लाख रुपये का नुकसान हुआ। पिछले साल बीटेक की150 सीटें रिक्त रह जाने से लगभग दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

विवि प्रशासन जनहित याचिका दाखिल होने की वजह से एमबीए के तीन विषयों में प्रवेश नहीं ले रहा है, लेकिन जिस तरह से रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में लापरवाही बरती जा रही है उससे शिक्षकों को यह भय सता रहा है कि आर्थिक संकट के कारण उन्हें न कहीं मुसीबत का सामना न करना पड़े।

इसलिए कुछ लोगों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर एमबीए (बीई), एमबीए (एचआरडी) व एमबीए (एफसी) में प्रवेश लेने का आदेश देने की गुहार लगाई है।

विवि प्रशासन ने आशुतोष सिंह की जनहित याचिका का हवाला देते हुए इस वर्ष एमबीए की 180 सीटों पर प्रवेश नहीं लिया जिससे विवि को लगभग 1.62 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसी तरह पिछले साल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक में 180 सीटों पर यूपीटीयू से छात्र नहीं आये और न विवि प्रशासन ने इन सीटों पर प्रवेश लेने की कोई पहल की जिससे विवि को 2.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अगर ऐसे ही घाटा होता रहा तो बिना अनुदान वाले पूविवि के विकास और वेतन भुगतान की समस्या खड़ी हो सकती है।  इस संबंध में कुलसचिव डा. बीएल आर्य ने कहा कि जनहित याचिका के चलते ही एमबीए में प्रवेश नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि आर्थिक नुकसान छात्रों के भविष्य से महत्वपूर्ण नहीं है। बीटेक में प्रवेश न होने के संबंध में उन्होंने कहा कि जितने अभ्यर्थी यूपीटीयू से आये थे उन्हें प्रवेश दिया गया। इस वर्ष केवल दो सीटें ही खाली हैं।

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