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बाथटब बना स्टेटस सिंबल!

बाथटब बना स्टेटस सिंबल!

समय बदला, लोगों के रहन-सहन का तरीका बदला और साथ ही बदला नहाने का अंदाज भी। बाथरूम अमीर और धनाढ़य लोगों की विलासता का एक ऐसा मानक बन गया, जहां स्नान घर महज नहाने भर का साधन नहीं बल्कि ऐशो-आराम की सैरगाह बन गया। भव्य बाथरूम और उसमें एक खुबसूरत बाथटब तो मानो लोगों के लिए रूतबा और दिखावा-सा हो गया।

आधुनिक बाथरूम और उसमें एक झक्कास बाथटब न हो, ऐसा हो नहीं सकता। मामला आराम का जो है। पहले लोग बेडरुम और गेस्ट रुम की सजावट को लेकर गंभीर रहते थे, लेकिन भागती-दौड़ती जिंदगी में अब लोग बाथरूम को भी तवज्जो देने लगे हैं। जाहिर है कि थके-मांदे घर आने पर अमूनन लोगों का पहला काम नहाने का होता है। ऐसे में अगर एक सुंदर बाथरूम हो और उसमें नहाने के लिए एक अदद खुबसूरत बाथटब हो तो क्या कहना।

इंटिरियर डेकोरेटर इंदु वर्मा का मानना है कि बदलते समय में बाथरूम अब घर का एक ऐसा अभिन्न अंग बन गया है जहां पर लोग न केवल खासा ध्यान दे रहे हैं बल्कि इस पर खूब पैसे भी बहा रहे हैं। मौजूदा समय में आजकल जो आलीशान भवन बन रहे हैं उनमें उसका बाथरूम बेडरुम से कमतर नहीं मिलेगा। जाहिर है उसमें लाखों रूपये का बाथटब काफी अहम होता है जो बाथरूम की ही नहीं बल्कि पूरे घर की शोभा बढ़ाता है।

मनोविज्ञान विषय की शोध छात्रा सविता तिवारी कहती हैं कि समय कम होने के चलते लोगों के आराम करने की सोच में बदलाव आया है। अब तो लोग बाथटब में लेट कर न केवल न्यूजपेपर और अपनी मनपसंद पत्र-पत्रिकाओं के पढ़ने का मजा उठाते हैं बल्कि साथ में चाय या कॉफी की चुस्की भी लेते हैं, जो उनके बाथटब में नहाने के मजे को दोगुना कर देता है।

कामकाजी लोगों में भी बाथटब में नहाने का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। बाथरूम के बाथटब को लोग अब आरामगाह के रूप में देखने लगे हैं। थके-मांदे काम से आए और पसर गए बाथटब में। यही वजह है कि अच्छे घरों में अच्छा बाथरूम होना जहां अनिवार्य सा हो गया है वहीं एक अच्छे बाथरूम में अच्छा बाथटब होना भी जरूरी लगने लगा है।

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