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वैज्ञानिकों का दावा, श्राउड ऑफ त्युरिन मानव निर्मित

वैज्ञानिकों का दावा, श्राउड ऑफ त्युरिन मानव निर्मित

वैज्ञानिकों ने श्राउड ऑफ त्युरिन या त्युरिन का कफन को फिर से बनाया है और कहा है कि प्रयोगों से यह कपड़ा जाली साबित हुआ है। श्राउड ऑफ त्युरिन में सूली पर चढ़े किसी व्यक्ति के हाथों और पैरों में लगी कील से रिसे खून के निशान हैं और श्रद्धालु इसे ईसा मसीह से जोड़ते हैं।

इटालियन कमेटी फॉर चेकिंग क्लेम्स ऑन पैरानार्मल ने कहा कि वैज्ञानिकों ने उसी सामग्री और विधि के इस्तेमाल से कफन को पुन: निर्मित किया है जो 14वीं सदी में उपलब्ध थी। समूह ने एक बयान में कहा है कि इस बात के प्रमाण हैं कि श्राउड मध्यकाल में तैयार किया गया था। 1988 में वैज्ञानिकों ने रेडियोकार्बन डेटिंग का इस्तेमाल कर पता लगाया कि कफन को 13वीं या 14वीं सदी में बनाया गया था।

बहरहाल, विवाद यथावत है क्योंकि विशेषज्ञ यह नहीं समझा पाए कि लगभग रंगहीन हो चुके इस कपड़े को कैसे बनाया गया था और फोटोग्राफी की खोज से सदियों पहले इस पर आकृति कैसे उभारी गई थी।

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