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पानी के टोह में चांद पर दिवाली मनाएगा अमेरिका

पानी के टोह में चांद पर दिवाली मनाएगा अमेरिका

भारत के चंद्रयान और उस पर लगे नासा के उपकरण द्वारा चांद पर पानी की मौजूदगी के ठोस संकेत दिए जाने के बाद अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी अब इस बारे में और अधिक सबूत जुटाने के लिए आगामी नौ अक्टूबर को को चंद्रमा की सतह से सेंटॉर रॉकेट को टकराएगी, जिससे धरती के इस प्राकतिक उपग्रह पर दीपावली की आतिशबाजी जैसा नजारा दिखेगा।

वैज्ञानिक नासा के इस प्रयोग का बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सेंटॉर रॉकेट को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से 90 मील दूर उस सतह से भिड़ाया जाएगा, जहां कभी सूरज की किरणें नहीं पहुंच पातीं जिससे चांद के इस हिस्से पर हमेशा अंधेरा छाया रहता है। चंद्रयान और उस पर लगे अमेरिकी उपकरण ने इसी अंधेरे स्थान पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन यानी पानी के कणों की मौजूदगी के संकेत दिए थे।

सेंटॉर रॉकेट उन्नत मिसाइल तकनीक पर आधारित है जिसकी टक्कर से चंद्रमा पर मिट्टी का गुबार उडे़गा जो सूर्य की किरणों के सपंर्क में आकर आतिशबाजी की तरह चमक उठेगा। खगोल विज्ञानी और स्पेस के संस्थापक अध्यक्ष अमिताभ पांडे का कहना है कि सेंटॉर का चंद्र सतह से टकराना एक क्रांतिकारी प्रयोग होगा। विस्फोट के कारण चांद की सतह से गुबार उठेगा और वहां एक बहुत बड़ा गड्ढा बन जाएगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नौ अक्टूबर को भारतीय समय के अनुसार सुबह लगभग साढे़ ग्यारह बजे सेंटॉर रॉकेट की टक्कर से होने वाले धमाके का असर इतना होगा कि चंद्रमा का हमेशा अंधेरे में डूबा रहने वाला हिस्सा चमचमा उठेगा जिसे आठ या 10 इंच की दूरबीन से धरती से आसानी से देखा जा सकेगा। पांडे के अनुसार चंद्रमा पर उठने वाले गुबार की चमक से यह पता चल सकता है कि चंद्रमा पर पानी है या नहीं और यदि है तो किस रूप में है।

ढाई हजार किलोग्राम वजनी सेंटॉर के वार से चंद्रमा पर लगभग 250 टन मिट्टी 10 किलोमीटर की उंचाई तक उछल जाएगी और निशाने वाली जगह पर 66 फुट का गड्ढा बन जाएगा। उल्लेखनीय है कि भारत के चंद्रयान-1 पर लगाए गए नासा के उपकरण मून मिनरोलॉजी मैपर [एम 3] ने चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी के ठोस संकेत दिए थे, जिसकी पुष्टि अमेरिका ने गत 24 सितंबर को की। इस पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] ने कहा था कि पानी की मौजूदगी के संकेत तो अमेरिका के एम3 से पहले ही मिल गए थे जो चंद्रयान1 पर लगे भारतीय उपकरण मून इंपैक्ट प्रोब [एमआईपी] ने दिए थे।

अमेरिका चंद्रमा के सेबियस ए नाम के जिस हिस्से पर रॉकेट से वार करने जा रहा है, वह जगह चंद्रयाऩ1 मिशन से मिली जानकारी के आधार पर ही चुनी गई है। वैज्ञानिक गौहर रजा का कहना है कि चंद्रमा पर रॉकेट का वार एक अनोखा प्रयोग होगा जिससे अंधेरे वाली चंद्र सतह जगमगा उठेगी।

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