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दो टूक (06 अक्तूबर, 2009)

गंगा की सफाई के एक और महाअभियान की घोषणा हो गई है। किसी नई मंजिल की ओर बढ़ते वक्त यह देखना बेहद जरूरी है कि पिछली यात्रा का जमा हिसाब-किताब क्या रहा। गंगा एक्शन प्लान-1 व 2 के नाम पर खर्च हुए सैकड़ों करोड़ रुपयों से क्या हासिल हुआ?

इसी तरह यमुना की सफाई पर भी हजारों करोड़ रुपये बहाए गए। अगर पिछली नाकामियों के कारणों को पहचाना नहीं गया तो तय है कि आगे भी हमें कुछ हासिल नहीं कर होगा। देश में नदियों की बदहाली का हमारे राज-समाज से गहरा रिश्ता है। कभी नदियों को पूजने वाला यह देश आज इन्हें गंदी नालियों से ज्यादा इज्जत नहीं देता। इस नजरिए को बदले बिना, सिर्फ पैसा बहाकर, जीवन वाहिनियों को जिलाने की उम्मीद करना बेवकूफी ही होगी।

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  • Web Title:दो टूक (06 अक्तूबर, 2009)