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न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी दमदार भविष्य का क्षेत्र

किसी भी कोर्स को चुनने से पहले सेफ्टी राडार से देखने की जरूरत है ताकि आप करियर के सफर को बुलंदियों पर पहुंचा सकें। लेकिन चूंकि करियर के आसमान में कोर्स का जबरदस्त ट्रेफिक है, सो ऐसे में जरूरत है उने कोर्सो के बारे में सोचने की, जो सुरक्षा की गारंटी के साथ आपको करियर का बेहतर मुकाम दिलाने में मददगार हों। ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए पूरे विश्व में कश्मकश जारी है। ऐसे में नाभिकीय ऊर्जा समस्या के समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है। उसके माध्यम से जहां ऊर्जा की बचत की जा सकती है, वही इसकी लागत को भी कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से ऊर्जा के उत्पादन में होने वाली परेशानी को दूर किया जा सकता है।

न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी
क्यों हैं भविष्य का क्षेत्र :  आज पूरे विश्व में पचास मिलियन टन हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग किया जाता है। अगर आंकड़ों की मानें तो ऊर्जा के रूप में उपयोग करने पर नौ मिलियन टन हाइड्रोजन बीस से तीस मिलियन कार या आठ से नौ मिलियन घरों में ऊर्जा दे सकती है। इसके उपयोग से हमारी तेल के उपर निर्भरता कम हो जाएगी। आज भारत में विद्युत उत्पादन का 3 प्रतिशत नाभिकीय ऊर्जा से होता है। इसको बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने कमर कस ली है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले दो दशकों में यह कारोबार 100 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की हरी झंडी मिलने के बाद प्राइवेट सेक्टर की कई कंपनियां भी इस क्षेत्र में आ सकती हैं।

2025 तक विद्युत ऊर्जा के उपयोग को 25 प्रतिशत करने का भारत का लक्ष्य है। भारत ने 2020 तक 20 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों की बात पर गौर करें, तो नाभिकीय डील और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों की वजह से आने वाले समय में इस क्षेत्र में एक लाख प्रशिक्षित लोगों की दरकार होगी।

योग्यता
न्यूक्लियर साइंस में करियर बनाने के लिए इंजीनियरिंग स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट कोर्स भी कर सकता है। इसके अलावा विज्ञान की मूलभूत जानकारियां, अपग्रेड होती तकनीक, विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता के बारे में जानकारी होना निहायत जरूरी है। इस कोर्स का मुख्य मकसद ऐसे इंजीनियरों को तैयार करना है, जो नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में विशेषज्ञ हों।

कहां है अवसर
इस क्षेत्र में आने वाले समय में करियर की नई संभावनाएं पैदा होंगी। पर्यावरण और चिकित्सा के क्षेत्र में इसका स्कोप तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसका सबसे प्रमुख इस्तेमाल ऊर्जा के  रूप में है। नाभिकीय विखंडन के द्वारा ऊर्जा का उत्पादन कर सकना एक बड़ी चुनौती है।

नाभिकीय शिक्षा के क्षेत्र में डिपॉर्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी बढ़-चढ़ कर काम कर रहा है। भारत में नाभिकीय तकनीक का यह प्रमुख क्षेत्र है और वह सारे नाभिकीय स्टेशनों के डिजाइन, निर्माण और ऑपरेशन का काम देखता है। इसमें भíतयों का काम भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई देखता है। डीएई का ट्रेनिंग कोर्स एक वर्ष की समय सीमा का होता है और इसमें इंजीनियर और वैज्ञानिकों का चयन राष्ट्रीय स्तर की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से होता है। करियर के लिहाज से आप विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं। पावर जनरेशन में न्यूक्लियर रिएक्टर की डिजाइनिंग, कार्य विधि और उसकी सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र में भी कई मौके हैं। मेडिसन करियर में डायगोनिस्टक इमेजिंग जैसे एक्सरे, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, अल्ट्रासाउंड, डायगोनिस्टक फोटोग्राफर के रूप में करियर बना सकते हैं। कृषि तथा खाद्य इंडस्ट्री में नाभिकीय तकनीक के इस्तेमाल द्वारा उन्नत तथा रोगविहीन फसलों के उत्पादन में रोजगार के अवसर बनते हैं।

शोध : नई जनरेशन के न्यूक्लियर पावर रिएक्टर डिजाइन तैयार करना, विखंडन के लिए रिएक्टर के डिजाइन तैयार करना, स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए नए पावर सोर्स बनाना सरीखे कई कामों में शोध जारी है। इसके अलावा विभिन्न क्षे त्रों में रेडियोएक्टिव पदाथरें का उत्पादन, उसके औद्योगिक और चिकित्सकीय प्रयोग के क्षेत्रों  में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के रिसर्च और डेवलपमेंट के कई प्रोगाम संचालित होते हैं। जिनमें म्यूटेशन ब्रीडिंग, फसलों का जेनेटिक इंप्रूवमेंट, जमीन का आइसोटोप की सहायता से अध्ययन, कीटनाशकों के अवशेषों का विश्लेषण शामिल होता है।

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