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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राजनीति न खेले मायावती सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राजनीति न खेले मायावती सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार को आदेश की अवहेलना करते हुए लखनऊ में स्मारकों का निर्माण कार्य जारी रखने पर कड़ी फटकार लगाते हुए उसे अदालत से राजनीति खेलने के प्रति आगाह किया।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति आफताब आलम की पीठ ने मायावती सरकार की तरफ से न्यायालय में हाजिर हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे से सख्त लहजे में कहा राजनीति का खेल मत खेलिए, जैसा कि आप विधानसभा में अन्य सियासी पार्टियों के साथ खेलते हैं।

पीठ ने न्यायालय के संबंधित पूर्व आदेश के भ्रमपूर्ण होने की राज्य सरकार की दलील को भी खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा हमने आपके शपथपत्र को बहुत तकलीफ के साथ पढ़ा। इसमें आपने जो बात कही है उसमें गम्भीरता की कमी है। यह आंखों में धूल झोंकने वाली बात है। पीठ ने कहा कि समझदारी का तकाजा यह है कि कोई भ्रम होने की स्थिति में राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह जरूरी स्पष्टीकरण के लिए अदालत से संपर्क करे।

न्यायालय ने ये बातें लखनऊ के हदय स्थल में 2600 करोड़ रुपये की लागत से बहुजन समाज पार्टी [बसपा] संस्थापक कांशीराम तथा अन्य दलित नेताओं के स्मारकों के निर्माण कार्य की वैधानिकता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहीं।

आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में आठ सितम्बर को हलफनामा दाखिल किए जाने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने शपथपत्र का उल्लंघन करते हुए स्मारकों का निर्माण कार्य जारी रखा। इस तरह उसने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की है। ढाई घंटे से ज्यादा समय तक चली मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई की तिथि छह अक्टूबर नियत की है।

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