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गुणसूत्रों की रक्षा पर खोज के लिए नोबेल पुरस्कार

गुणसूत्रों की रक्षा पर खोज के लिए नोबेल पुरस्कार

गुणसूत्रों की रक्षा संबंधी महत्वपूर्ण खोज के लिए अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों एलिजाबेथ एच ब्लैकबर्न, कैरोल डब्ल्यू ग्रेडर और जैक डब्ल्यू सोस्तैक को चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2009 के नोबेल पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है।

स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीटय़ूट स्थित नोबेल असेम्बली की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘इस साल का नोबेल पुरस्कार इस खोज के लिए दिया गया है कि क्रोमोजोम्स (गुणसूत्रों )की रक्षा टेलोमेयर्स और टेलोमेरेस एन्जाइम  कैसे करते हैं।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘इन तीनों वैज्ञानिकों को जीवविज्ञान की एक महत्वपूर्ण समस्या के समाधान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।’’ ब्लैकबर्न, ग्रेडर और सौस्तैक ने यह पता लगाने में कामयाबी हासिल की है कि कोशिकाओं  के विभाजन के दौरान किस प्रकार गुणसूत्रों की शत-प्रतिशत नकल की जा सकती है और किस प्रकार उन्हें नष्ट होने अथवा अपकर्ष से बचाया जा सकता है।

इन तीनों वैज्ञानिकों द्वारा की गई खोज के अनुसार गुणसूत्रों के अंतिम छोर पर मौजूद  टेलोमेयर्स व टेलोमेरेस नामक एन्जाइम की मदद से गुणसूत्रों की रक्षा संभव है। ब्लैकबर्न और सोस्तैक ने यह खोज की है कि टेलोमेयर्स में एक अनूठा डीएनए अनुक्रम यह सुनिश्चित करता है कि गुणसूत्रों की रक्षा हो सके। ग्रेडर और ब्लैकबर्न ने मिलकर टेलोमेरेस नामक एन्जाइम की पहचान की है जो टेलोमेयर डीएनए का निर्माण करता है।

गौरतलब है कि अगर टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं तो कोशिकाएं जल्द ही बूढ़ी होने लगती हैं, अगर टेलोमेरेस की सक्रियता ज्यादा है तो इससे टेलोमेयर की लंबाई को बनाए रखने में मदद मिलती है और कोशिकाएं जल्द उम्रदराज नहीं होतीं। कैंसर की कोशिकाओं के मामले में कुछ ऐसा ही होता है। दूसरी ओर कई अनुवांशिक बीमारियां त्रुटिपूर्ण टेलोमेरेस के कारण होती हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।

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  • Web Title:गुणसूत्रों की रक्षा पर खोज के लिए नोबेल पुरस्कार