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शीत ऋतु की स्वादिष्ट सब्जियां

शीत ऋतु की स्वादिष्ट सब्जियां

सितम्बर बीत चला। सुबह-शाम और रात की हवा में ठंडक आने लगी है। अब समय आ गया है कि सर्दियों की बगिया की तैयारी की जाए। कुछ लोग तो वर्षा समाप्त होते ही सितम्बर में ही इसकी तैयारी शुरू कर लेते हैं, परन्तु यदि आपने नहीं की तो अब शुरू कर दें। वर्षा कम हो या ज्यादा, क्यारी की तैयारी तो करनी ही होगी। वर्षा के उमस भरे दिनों में मिट्टी में तरह-तरह के कीट, फफूंद आदि पनप जाते हैं, इसलिए खुदाई करनी बहुत जरूरी होती है। मिट्टी में बार-बार खुदाई करने से कीट तो मरते हैं ही, साथ ही वह धूप की गर्मी से संक्रमण रहित भी होजाती है। बार-बार खुदाई करने से मिट्टी हल्की व भुरभुरी हो जाती है, जिससे पौधे की जड़ों के विकास में लाभदायक होती है। याद रखें कि स्वस्थ जड़ें ही पौधे को स्वस्थ रखती हैं और पौधे को पर्याप्त मात्रा में भोजन प्रदान करती हैं। खुदाई करते समय गोबर की पुरानी खाद जमीन में मिला दें और उसकी गुड़ाई भी साथ ही कर दें। अक्सर हम सोचते हैं कि सब्जी तो कैसे भी हो जएगी, पर गुणवत्ता में कमी आ जाती है।

सब्जियां जहां पर भी लगाएं, वहां धूप अवश्य आनी चाहिए। धनिया, मेथी, पालक, बैंगन, गोभी हो या जमीन के भीतर की मूली, पौधों को धूप अवश्य मिलनी चाहिए। मिट्टी तैयार करने के बाद आप क्यारी बना लें। इस बात का ध्यान रहे कि जिस क्यारी में पहले टमाटर की फसल हो, उसमें पुन: टमाटर न लगाएं। इसी प्रकार जिन क्यारियों में आपने सेम, लोबिया लगाया हो, वहां पर कंदीय सब्जियां, शलजम, मूली, चुकन्दर आदि लगाएं। क्यारियों में सब्जियां लगाते समय अपनी जरूरत का ध्यान रखकर यदि आप सही योजना बनायेंगे तो थोड़ी-सी जमीन में भी बहुत सारी सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं। हरा धनिया के लिए छोटी-सी क्यारी बहुत होती है तो पालक, सरसों व मेथी की थोड़ी बड़ी। हरी मिर्च के लिए मात्र चार पौधे ही आपकी दैनिक आवश्यकता पूरी कर देंगे। क्यारी में मुंडेर पर आप शलजम, मूली बोकर बीच की नाली में पालक लगा दें। मूली, शलजम, गाजर व छोटी गोल लाल मूली को कभी एक साथ न डालें, बल्कि एक बार में थोड़ा-थोड़ा बीज डालें। दस दिन के बाद दूसरी बार, फिर दस दिन बाद तीसरी बार, इस प्रकार बांट कर बीज बोने से ताज मूली, शलजम की फसल हमें लम्बे समय तक मिलती रहेंगी। एक साथ लगाने पर एक बार में सब्जी इतनी अधिक तैयार होजाती है कि हम उन्हें प्रयोग में भी नहीं ला सकते। साग व टमाटर की क्यारी के किनारे पर लहसुन की स्वस्थ कलियां निकाल कर बो दें। लहसुन कीटनाशक का काम भी करता है। सलाद व लाल गोल छोटी मूली भी साग के किनारे बोने से लाभ रहता है। इसे आवश्यकता के अनुसार थोड़ा-थोड़ा निकाला ज सकता है। मेथी, धनिया, पालक जसी शाक-सब्जियों को कैंची से काटिए। एक महीने बाद पत्ती की खाद की पतली परत बिछा दें। खर-पतवार गुड़ाई द्वारा नियमपूर्वक निकलते रहें। यह जरूरी है।

सब्जियों में रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग न करें तो अच्छा है। टमाटर, बैंगन के विषाणुग्रस्त पौधों को निकाल कर जला देना ही ठीक होता है। यह रोग हवा के साथ फैलता है। खाद के लिए आप पत्ती की खाद में नीम की खली मिलाकर पौधों को दे सकते हैं। फूलगोभी, बंद गोभी व गांठ गोभी के पौधे जब 6 इंच बड़े हो जाएं तो नीचे तने पर मिट्टी चढ़ा दें।

कीटनाशक के रूप में आप 50 ग्राम लहसुन को छिलके समेत पीस लें और उसमें पाव भर के करीब नीम की पत्तियां मिलाकर उबाल लें। इस पानी को ठंडा करके छान लें व साफ पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसका गोभी, टमाटर व बैंगन पर प्रयोग करें। हर सप्ताह छिड़काव करें। आप चाहें तो तम्बाकू के पत्तों को भिगोकर उबाल लें। उसका पानी भी छिड़काव के लिए प्रयोग कर सकते हैं।

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