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लोकसभा के बाद विधानसभा में भी हैट्रिक पर है हुड्डा

हरियाणा की राजनीति में गहरी जड़ें जमा चुके राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक जमाने के बाद अब राज्य विधानसभा चुनावों में भी हैट्रिक बनाने की ओर अग्रसर हैं।

राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हुड्डा लोकसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बना चुके हैं तथा अपने निर्वाचन क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रभाव और किए गए विकास कामों की बदौलत इस बार विधानसभा चुनाव में भी उनके हैट्रिक बनाने की सम्भावनाएं प्रबल हैं।

मुख्यमंत्री अगर विधानसभा चुनाव में भी हैट्रिक बना जाते हैं तो वह राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बाद दूसरे राजनीतिज्ञ होंगे जिन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार चुनाव जीत करके हैट्रिक बनाई है। इससे पहले केवल बंसीलाल को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक का इतिहास रचने का श्रेय हासिल है।

बंसीलाल ने वर्ष 1967,1968 और 1972 के विधानसभा चुनाव लगातार जीत करके हैट्रिक बनाई थी। इसके बाद उन्होंने 1980,1984 और 1989 के लोकसभा चुनाव भी लगातार जीत कर अपनी राजनीतिक शख्सीयत और कद का अहसास कराया था।

अब लाख टके का सवाल यह है कि क्या हुड्डा इस इतिहास को दोहरा पाएंगे। वैसे इसमें संदेह की कोई गुंजाईश नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री ने रोहतक जिले में जो विकास कराए हैं वह जगजाहिर हैं तथा हुड्डा का गढ़ सांपलाकिलोई हलका भी इसी जिले में आता है।

हुड्डा हालांकि यह दावा करते रहे हैं कि उनके सरकार के लगभग साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में राज्य में सभी हिस्सों में समान और अभूतपूर्व विकास हुआ है तथा विकास की यह गति राज्य को नम्बर एक बनाने के लिए अनवरत जारी है। चाहे यह पानी के समान बंटवारे के लिए नहरों का निर्माण, बिजली संकट दूर करने के लिए अनेक बिजली परियोजनाओं का निर्माण, शिक्षा और खास तौर पर उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन या फिर मैट्रो रेल के लिए ढांचे का विकास, .सड़क नेटवर्क, रेलवे ओवर ब्रिज, फ्लाईओवर और सरकारी भवनों के निर्माण की बात हो।

उनका कहना है कि उनकी सरकार ने समाज के सभी वर्गों के कल्याणार्थ अनेक कदम उठाए हैं। इनमें बुजुर्ग, स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी विधवाओं तथा विभिन्न युद्धों में शहीद हुए जवानों के परिवारों और उनकी विधवाओं के लिए पेंशन में बढ़ौतरी, बेराजगारों को भत्ता, गरीब और अनूसूचित जातियों के परिवारों को मुफ्त भूखंड और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, बिजली बिल माफी और कर्ज पर ब्याज माफी आदि अनेक अप्रत्याशित कदम हैं।

उधर विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल, भारतीय जनता पार्टी, (भाजपा) और हरियाणा जनहित कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दल यह आरोप बार बार लगाते रहे हैं कि हुड्डा सरकार में विकास केवल रोहतक तक ही सिमट कर रह गया था। उनका आरोप है कि सरकारी नौकरियों में भी क्षेत्रवाद के आधार पर भेदभाव हुआ है और नौकरियां अधिकतर रोहतक के लोगों के खाते में गई हैं।

राजनीति के धुरंधर और विरोधियों की हर चाल की काट के माहिर हुड्डा अपनी सरकार के कामकाज के बलबूते पर विपक्ष को विधानसभा चुनावों में अब ललकार रहे हैं। गत लोकसभा चुनावों में राज्य की दस में नौ लोकसभा सीटें कांग्रेस की झोली में डालने के बाद उनके हौंसले एकदम बुलंद हैं।

किलोई विधानसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद वहां से कांग्रेस के लिए जीत का पहला आगा करने का श्रेय हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा को ही जाता है। लेकिन इसके बाद इस हलके पर विपक्ष काबिज हो गया और यह सिलसिला 1991 तक चला। वर्ष 1991 के विधानसभा चुनावों में किलोई से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णमूर्ति हुड्डा ने पार्टी के लिए दूसरी जीत दर्ज की।

वर्ष 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में हुड्डा ने रोहतक से पहली जीत दर्ज की और इस चुनाव में उन्होंने हरियाणा के दिग्गज किसान नेता और बाद में देश के उप प्रधानमंत्री रह चुके चौधरी देवी लाल को पराजित किया। इसके बाद तो उन्होंने पीछे मुड़कर ही नहीं देखा तथा 1991 के बाद 1996 और 1998 के संसदीय चुनावों में उन्होंने देवीलाल को लगातार पटखनी देकर रोहतक की राजनीति में अपनी धाक जमा दी।

वर्ष 2000 और 2005 में हुए उपचुनाव जीत कर हुड्डा ने विधानसभा में कदम रखा। किलोई उपचुनाव में उन्होंने अपने विपक्षी उम्मीदवार को रिकार्ड मतों के अंतर से पराजित किया। हुड्डा अब हैट्रिक पर हैं।

वैसे अगर गत लोकसभा चुनावों की बात करें तो रोहतक की राजनीति में हुड्डा परिवार का इस कदम प्रभाव है कि गत लोकसभा चुनाव के दौरान किलोई हलके के कांग्रेस प्रत्याशी और हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा को 87908 मत मिले थे जबकि उनके विरूद्ध इनेलो प्रत्याशी नफे सिंह राठी केवल 10099 वोट ही ले पाए।

गढ़ी सांपला किलोई हलके से इस बार दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। हुड्डा के मुकाबले इनेलो ने इस वीआईपी सीट से नए चहरे सतीश नांदल को उतारा है। भाजपा ने सोमदेव, हजकां ने सुरेश कुमार, बसपा ने फतेह सिंह,समस्त भारतीय पार्टी ने धर्मबीर चोटीवाला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने राजपाल सिंह को मैदान में उतारा है। इसके अलावा तीन निर्दलीय प्रत्याशी कृष्ण, बलबीर तथा कर्ण सिंह भी मैदान में हैं।

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