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हरियाणा में सिर्फ एक बार खाता खोल पाए वाम दल

हरियाणा में सिर्फ एक बार खाता खोल पाए वाम दल

हरियाणा में हर बार की तरह इस बार भी वाम दलों ने पूरे जोश के साथ अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि राज्य में इन दलों के लिए हमेशा वोटों का अकाल ही रहा है। राज्य के 10 विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक बार एक-एक सीट के साथ माकपा तथा भाकपा का खाता खुल पाया और इसके लिए भी उन्हें पूरे 20 साल का इंतजार करना पड़ा। 2005 में तो हालात ये हो गए कि इन दोनों दलों का वोट भी एक प्रतिशत से नीचे लुढ़क गया।

वर्ष 1967 के पहले विधानसभा चुनाव में भाकपा और माकपा ने क्रमश: 12 और आठ प्रत्याशी खड़े किए जिनमें से कोई भी चुनाव नहीं जीत पाया और इन दोनों दलों का वोट प्रतिशत क्रमश: 6.02 तथा 5.57 प्रतिशत रहा।

1968 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव में भाकपा ने तीन और माकपा ने अपना एक प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जो सभी हार गए और दोनों दलों को प्राप्त मतों का प्रतिशत 19.69 रहा। 1972 के विधानसभा चुनाव में भाकपा ने नौ और माकपा ने चार प्रत्याशी खड़े किए जिनके खाते में हार आई और मत प्रतिशत क्रमश: 17.12 तथा 07.07 रहा।

1977 में भाकपा ने 14 और माकपा ने चार उम्मीदवारों को चुनावी जंग में उतारा, लेकिन उनमें से भी कोई जीत का स्वाद नहीं चख पाया। इस बार दोनों दलों का मत प्रतिशत 19.53 रहा। वर्ष 1982 के विधानसभा चुनाव में भाकपा ने 15 और माकपा ने पांच उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन इस बार भी नतीजा ढा़क के तीन पात ही रहा और दोनों दलों का मत प्रतिशत क्रमश: 4.29 और 6.94 रहा।

1987 में भाकपा ने पांच और माकपा ने चार उम्मीदवार खड़े किए और इस बार दोनों दल अपना खाता खोलने में कामयाब हो गए और एक-एक सीट पर कब्जा जमाया। लेकिन इस कामयाबी के लिए उन्हें 20 साल का इंतजार करना पड़ा था।

इन्हें यह मामूली कामयाबी पूर्व उप प्रधानमंत्री ताउ देवीलाल के दल के साथ गठबंधन करने के कारण मिली। भाकपा ने शाहाबाद और माकपा ने टोहाना सीट पर जीत दर्ज की। मत प्रतिशत क्रमश: 8.35 और 15.85 रहा।

1991 में हुए चुनाव में इन दलों का खाता फिर से शून्य हो गया। इस चुनाव में भाकपा ने चार और माकपा ने पांच प्रत्याशी खड़े किए थे। दोनों दलों का मत प्रतिशत 4.97 और 14.28 रहा। 1996 में भाकपा ने नौ और माकपा ने आठ रणबांकुरे चुनाव मैदान में उतारे, लेकिन हार का सिलसिला फिर भी बरकरार रहा। मत प्रतिशत में भारी गिरावट आई और यह क्रमश: 2.27 तथा 1.77 रहा।

वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में भाकपा ने 10 और माकपा ने सात उम्मीदवार उतारे, लेकिन सभी हार गए। मत प्रतिशत 1.64 और 3.33 रहा। 2005 में भाकपा ने 10 और माकपा ने पांच उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, लेकिन इस बार नतीजा यह रहा कि दोनों दलों का मत प्रतिशत एक से नीचे लुढ़कर क्रमश: 0.23 और 0.14 प्रतिशत पर पहुंच गया और एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई।

इस बार के चुनाव में भाकपा ने आठ और माकपा ने 11 प्रत्याशी उतारे हैं। देखना यह है कि हरियाणा में 1987 में खाता खोलने के बाद 22 साल का सूखा देख चुकी ये पार्टियां इस बार सफलता हासिल कर पाती हैं या नहीं।

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