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फैशन ही नहीं बीमारियों में भी कारगर है गोदना

फैशन ही नहीं बीमारियों में भी कारगर है गोदना

ब्रिटिश फुटबालर डेविड बैकहम या फिल्म स्टार सैफ अली खान के लिए अपने शरीर पर गोदना गुदवाना एक फैशन हो सकता है लेकिन झारखंड में बच्चों को पेट की बीमारियों से बचाने के लिए उनकी नाभि के आसपास गोदना गुदवाया जाता है।

झारखंड के आदिवासी इलाकों में मात्र 21 दिन के बच्चों को इस पीड़ादायक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसके तहत गर्म दरांती से उसकी नाभि के आसपास की त्वचा को गोदा जाता है। आदिवासियों का मानना है कि इससे बच्चों पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का काला साया नहीं पड़ सकेगा।

कुछ डाक्टरों का मानना है कि बच्चों की नाभि के आसपास गोदना गुदवाने से वास्तव में इम्युनो मोड्युलेशन बनता है जिससे पेट की कुछ बीमारियों से रक्षा होती है।

बाल चिकित्सक अजित सहाय ने बताया मैंने अपने आदिवासी बाल मरीजों की नाभि के आसपास गोदना देखा है। हालांकि आदिवासी इसे एक परंपरा मानते हुए इसका पालन करते हैं लेकिन यह पद्धति चिकित्सा की दृष्टि से साबित हो चुकी है और यह बचपन में प्लीहा की रक्षा करती है।

सहाय का कहना है कि डाक्टरों ने पाया है कि गोदने से इम्युनो मोड्युलेशन होता है। झारखंड आदिवासी शोध संस्थान के निदेशक प्रकाश ओरांव कहते हैं कि गोदना न केवल झारखण्ड में बल्कि आंध्र प्रदेश में भी प्रचलन में है।

ओरांव ने बताया कि कुछ पारंपरिक उपचार अभी भी लाभकारी साबित हो रहे हैं, इसलिए झारखंड कल्याण विभाग ने घरेलू उपचारों के संबंध में एक पुस्तक प्रकाशित की है जिसमें औषधीय पौधों, छाल, पत्तों, फलों, फूलों तथा बीजों से विभिन्न बीमारियों के उपचार के बारे में विस्तार से बताया गया है।

किताब में 169 पेड़-पौधों के चिकित्सा उपचार की जानकारी दी गई है और बताया गया है कि किस प्रकार ये दिल की बीमारियों, मधुमेह, रक्तचाप, सामान्य जुकाम पेट की बीमारी और सांप के काटे के उपचार में सहायक हो सकते हैं।

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