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दो टूक (5 अक्टूबर, 2009)

मौमस के रुख में इन दिनों एक खास बात देखी जा रही है। इसमें अनिश्चितता के तत्व सामान्य से ज्यादा दिखाई देने लगे हैं। इस साल बीच बरसात देशवासी पानी के लिए तरसे। धान की रोपाई ठीक से नहीं हो पाई और अब शरद से ऐन पहले दक्षिण भारत भीषण बाढ़ की चपेट में है। अपनी दिल्ली में भी मौसम कुछ कम अप्रत्याशित नहीं। दो दिन पहले गर्मी अगस्त का अहसास करा रही थी तो रविवार को अचानक बूंदाबांदी ने रुख बदल दिया। मौसम विभाग अगले दो-एक दिनों में इंद्र देव की कृपा बने रहने की भविष्यवाणी कर रहा है। मौसम की इस उठापटक में मुश्किल उन लोगों को ज्यादा होती है जो इसके दुष्परिणामों को झेलने ही हैसियत नहीं रखते। बात चाहे बाढ़-सुखाड़ की हो या बीमारियों की, मौसम की मार हमेशा मजलूमों के ही हिस्से ज्यादा आती हैं।

 

 

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  • Web Title:दो टूक (5 अक्टूबर, 2009)