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चालीस के बाद शुगर-बीपी टेस्ट होगा अनिवार्य

चालीस के बाद शुगर-बीपी टेस्ट होगा अनिवार्य

सेहत के साथ समझौता कतई नहीं। इसलिए अब चालीस की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए मधुमेह (शुगर) और रक्तचाप (बीपी) की जांच अनिवार्य होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए देश भर में कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है।

इसकी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जरिये शुरू होगी। योजना के तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर शुगर और बीपी जांच की सुविधा तो होगी ही, मिशन में नियुक्त आशा हेल्थ वर्करों को भी शुगर और बीपी की जांच के लिए किटें प्रदान की जाएंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने यहां सार्क डाइबिट्क्सि कांफ्रेंस में यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ज्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि वहां मधुमेह, रक्तचाप की जांच और इलाज सुविधाओं की कमी है। इसलिए मिशन में यह कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
मधुमेह और इससे जुड़ी बीमारियों के खतरों से निपटने के लिए मंत्रलय ने राष्ट्रीय मधुमेह नियंत्रण कार्यक्रम तैयार किया है।

कार्यक्रम के लिए 1660 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मधुमेह एक्सपर्ट डॉ. अनूप मिश्र के अनुसार, देश में करीब चार करोड़ लोग मधुमेह की चपेट हैं जो 2030 तक दोगुने हो जाएंगे। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में 25-30 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 10-15 फीसदी लोग उच्च रक्तचाप की चपेट में हैं। अनिवार्य जांच से फायदा : हार्ट केयर फाउंडेशन के डॉ. के.के. अग्रवाल के अनुसार यदि शुगर और बीपी का जल्दी पता चल जाए तो 50 फीसदी हार्ट अटैक, 40 फीसदी हार्ट फेलियर, 45 फीसदी पैरालिसिस, तथा 75 फीसदी किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस कम हो जाएंगे।

उम्मीद की किरण : भारत समेत दुनिया में स्टेम सेल के जरिये पैंक्रियाज की उन सेल्स को उगाने पर शोध हो रहे हैं जो इंसुलिन पैदा करती हैं। यदि इसमें वैज्ञानिक सफल रहते हैं तो मधुमेह से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है।

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