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देह की मंडी बना सीता-सावित्री का देश

देह की मंडी बना सीता-सावित्री का देश

अपने देश भारत का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है, क्योंकि अति प्राचीन काल से सभ्यता और संस्कृति का केंद्र होने के साथ ही यहां अनेक ऐसी विभूतियां पैदा हुईं जिन्होंने पूरी दुनिया को मार्गदर्शन दिया।

वेद, उपनिषद, रामायण, गीता से होते हुए गौतम बुद्ध, विवेकानंद और महात्मा गांधी तक हमारी ऐसी परंपरा है जो विश्व की विरासत के तौर पर दुनिया को भारत ने दी। सीता, सावित्री और अनुसूइया जैसी नारियां सदियों से देश की आर्दश मानी जाती हैं, लेकिन इसी देश की आज एक दूसरी भी छवि है कि यहां के आधे से अधिक जिलों में यौनाचार के लिए महिलाओं और बच्चों की तस्करी के अड्डे बने हुए हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 612 जिलों में से आधे से अधिक जिलों में महिलाओं और बच्चों से यौनाचार के लिए उनकी तस्करी की जा रही है। रिपोर्ट कहती है कि 378 जिलों में 1,794 ऐसे चिह्न्ति स्थान हैं जो देह व्यापार जैसे अनैतिक कार्य के केंद्र हैं और 1,016 ऐसे स्थान हैं जहां पेशेवर देह व्यापार हो रहा है। केरल, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लगभग सभी जिले अनैतिक कार्यों के लिए महिलाओं और बच्चों की तस्करी की समस्या से ग्रस्त हैं। तमिलनाडु में 93. 33 प्रतिशत जिले, उड़ीसा में 86. 66 फीसदी जिले और बिहार में 86. 48 फीसदी जिले इस समस्या से प्रभावित हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15 साल से 35 साल की उम्र की महिलाओं की कुल आबादी में से 2.4 फीसदी महिलाएं वेश्यावृत्ति से जुड़ी हैं। इसमें कहा गया है भारत में पेशेवर यौनकर्मियों की संख्या करीब 28 लाख है। इनमें से 43 फीसदी से अधिक महिलाएं उस समय अवयस्क थीं जब वे देह व्यापार से जुड़ी थीं। आयोग का कहना है कि वेश्यावृत्ति के 50 फीसदी से अधिक मामलों का सबसे बड़ा कारण रोजगार के नाम पर झांसा देना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देह व्यापार से जुड़ी और इसकी खातिर तस्करी की शिकार 22 फीसदी से अधिक महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें उनके परिवार के सदस्यों ने ही इस धंधे में जाने के लिए बाध्य किया।

आयोग की रिपोर्ट आगे कहती है कि करीब आठ फीसदी महिलाओं को देह व्यापार के लिए उनके पतियों या ससुरालवालों ने बाध्य किया और 18 फीसदी महिलाओं को मित्रों या पड़ोसियों ने लालच दे कर इस धंधे में धकेला। पेशेवर देह व्यापार में लिप्त 51 फीसदी से अधिक महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें उनके परिवारवालों या ससुरालवालों ने इस धंधे में जाने के लिए मजबूर किया।

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  • Web Title:देह की मंडी बना सीता-सावित्री का देश