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बेटे की मौत से पिता के सपने हुए चकनाचूर

अरुण को अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि उनके आंखों का तारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। हर काम को कर दिखाने का जज्बा पेश करने वाले बेटे की मौत से वह टूट गए हैं। खुद के आंसू रुकते नहीं लेकिन अपनी पत्नी को तसल्ली देने की नाकाम कोशिश करते रहे।


आंखो में आंसू लिए अरुण कहते हैं कि हर समय घर के लोगों के फिक्रमंद रहने वाला शुभम एमबीए करके कारपोरेट जगत में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहता था। अपनी तरह छोटे भाई शिवम को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा था। शिवम भी मानव रचना इंजीनियरिंग कालेज में बीटेक फस्र्ट इयर का छात्र है। उसके पिता ने बताया कि शुभम शुरु से ही आलराउंड फस्र्ट क्लास स्टूडेंट रहा है। उसको लेकर उन्होंने बड़े सपने देख रखे थे। नौकरी के बाद अगले साल उसकी शादी कर घर में बहू लाने की योजना थी। लेकिन सारे सपने एक हवा के झोंके में उड़ गए। बेटे की मौत के सदमे से वह उभर नहीं पा रहे हैं। बेटे की याद में रो-रोकर पिता का बुरा हाल है। हाल में शुभम ने बीएसएनएल में जेटीओ के पद पर नौकरी के लिए इग्जाम दिया था। मां राधारानी का तो बुरा हाल है। बार-बार बेहोश हो जाती हैं। घर के लोग उन्हीं को संभालने में जुटे रहे। अरुण अपने आंसू पोछ बार-बार उन्हें चुप कराने की नाकाम कोशिश करते रहे। शुभम के मामा नरेश बताते हैं कि उसकी मौत के सदमे से परिवार को उबरने में काफी समय लगेगा। वह घर में सबसे बड़ा था। अपने परिवार के लड़कों के लिए रोल मॉडल था।

पढ़ाई के साथ खेल में भी थी रुचि
शुभम पढ़ने लिखने के साथ खेल कूद में काफी रुचि रखता था। पहले साल से अब तक 65 फीसदी से ज्यादा नंबरों से पास होने के साथ उसकी वेटलिफ्टिंग व स्क्वायस में काफी दिलचस्पी थी। कालेज में हमेशा वह खेलकूद के आयोजनों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेता था। होस्टल के छात्रों का प्रिय शुभम को सभी बड़े भईया कह कर पुकारते थे। अपने साथियों के लिए हर समय मदद को तैयार रहता था। होस्टल में रहने वाले आकाश बताते हैं कि छात्रों की हर तरह की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करते थे। इसी के चलते वार्डन देवेंदर वशिष्ठ उसको पसंद नहीं करते थे।

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