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शहर के कई इलाकों में स्थायी जलजमाव प्रशासन फेल

लोग कहते हैं कि हम पॉश इलाके में रहते हैं मगर हालत यह है कि हम किसी को अपने घर बुलाने से भी कतराते हैं। सीवर के बदबूदार पानी से गुजरकर कोई हमारे घर पैदल तो आ ही नहीं सकता। हमारा इलाका बीमारी का घर है।

यहां डेंगू मलेरिया कुछ फैल सकता है। पानी को हटाने का कोई इंतजाम नहीं हो सका है। यह कहना है शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित द पैलेडियन के  आरडब्लूए अध्यक्ष हिंमाशु गुप्ता का। साउथ सिटी टू में मालिबू टाउन और मेफील्ड गार्डेन को जोड़ने वाली इस सड़क से रोजवुड सिटी, साउथ सिटी समेत शहर के दक्षिणी हिस्से के कई अपार्टमेंट तक लोग पहुंचते हैं। सड़क  का नजारा नरक से भी बदतर है। प्रशासन इस ओर अपनी लाचारी यह कह कर जता रहा है कि यह सड़क का मामला पहले कोर्ट में था। अभी तक यह हुडा के अधीन नहीं आया। इसकारण सीवर लाइन यहां नहीं है। सड़क से गुजरना मुहाल है। स्थायी  जलजमाव शहर के इसी हिस्से की नहीं बल्कि कई और हिस्से की समस्या है।

हीरो होंडा चौक  के पास एक बड़े क्षेत्र में गंदा पानी भरा है। सेक्टर 10, सेक्टर 10 ए पेस सिटी,और सेक्टर 33 के औद्योगिक इलाकों के  प्रतिनिधियों मार्बल व्यवसायियों ने कई बार सरकार से शिकायत की मगर इसका समाधान नहीं निकला है। हीरो होंडा चौक राष्ट्रीय राजमार्ग का प्रमुख चौराहा है। इसे 750 करोड़ रुपए खर्च कर बनाया गया है मगर इसके  पड़ोस में खेड़की दौला के पास गंदे पानी का यह नरक शहर में कई बीमारियों को आमंत्रित करता नजर आता है। सेक्टर 30 के पास स्थित पुराने पार्क में जल जमाव है। यह इलाका भी राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा है। मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां यहां भी दस्तक दे सकती है। आरडब्लूए संगठनों के प्रतिनिधि संगठन फोरवा के उपाध्यक्ष वीके श्रीवास्तव का कहना है कि हम इस शहर में सफाई और शांति के कारण रहने आए थे। अपने घरों बनाने में लोगों ने अपनी सारी जमा पूंजी लुटा दी। टैक्स के रूप में हम एक अच्छी खासी रकम भरते हैं मगर प्रशासन ने हमें गांव से भी बदतर जिंदगी दी है।

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