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नए विवि, कॉलेजों के दिन बहुरेंगे

यूजीसी से अनुदान पाने के नियमों में संशोधन से प्रदेश के आधे राजकीय डिग्री कॉलेजों और आधा दजर्न विश्वविद्यालयों के लिए उम्मीद की राह खुल गई है। अब पुराने कॉलेजों के अलावा ये नए कॉलेज भी मदद के लिए आवेदन कर सकेंगे और संभावित आर्थिक मदद से इनमें बुनियादी ढांचा खड़ा हो सकेगा।

अभी तक उन्हीं कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को यूजीसी से अनुदान मिलता है जिनके पास भवन, लैब, लाइब्रेरी, रेगुलर शिक्षक-कर्मचारी उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों के मामले में तो उपयरुक्त मानकों के अलावा पांच पीजी विभाग होने भी जरूरी हैं। इन्हीं मानकों के चलते प्रदेश के 69 राजकीय कॉलेजों में से केवल 35 को ही मदद मिल पा रही है।

इसी प्रकार दून विवि, ओपन विवि, संस्कृत विवि और तकनीकी विवि भी मदद के दायरे में नहीं हैं। इस पैमाने पर आयुर्वेद विवि और प्रस्तावित औद्यानिकी विवि भी स्वत: ही बाहर हैं। लेकिन, नए मानकों के बाद 34 डिग्री कॉलेजों और छह विश्वविद्यालयों की स्थिति में सुधार की उम्मीद पैदा हो गई है।

यह मदद इसलिए मायने रखती है क्योंकि मदद से वंचित ज्यादातर कॉलेजों के पास भवन नहीं है। लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाएं तो दूर की बात हैं। संस्कृत विवि का परिसर पैसे के अभाव में लटका है। जबकि, तकनीकी विवि परिसर का भी कमोबेश यही हाल है। इन विश्वविद्यालयों, कॉलेजों को शिक्षकों-कर्मियों के लिए भले ही लंबे समय तक इंतजार करना पड़े, लेकिन कम से कम बुनियादी ढांचा तो खड़ा हो ही सकेगा।

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