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सिंगरौली कोलफील्ड में अब अंडरग्राउंड माइनिंग

सिंगरौली कोलफील्ड में अब अंडरग्राउंड माइनिंग के जरिये कोयला खनन के साथ ही कोलबेड मिथेन के उत्पादन की सम्भावना है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले इस कोलफील्ड में 600 से 1200 मीटर गहराई तक कोयले का विशाल भंडार है। इस कार्य के लिए सिंगरौली के तिनगुड़ी व झिंगुरदह में सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है जबकि बिजुल में शीघ्र ही काम शुरू होने की सम्भावना है।

लगभग 2202 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सिंगरौली कोलफील्ड में एक अप्रैल 2009 तक के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 12416.51 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद है। इसमें 300 मीटर गहराई तक प्रमाणित, निर्दिष्ट एवं अनुमानित कोयले का कुल भंडार लगभग 7951.36 मिलियन टन हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 300 से 600 मीटर गहराई तक 4420.98 मिलियन टन कोयला होने की सम्भावना है जबकि 600 से 1200 मीटर गहराई तक लगभग 44.17 मिलियन टन कोयला मौजूद हो सकता है।

कोयले व कोलबेड मिथेन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सिंगरौली के तिनगुड़ी गांव के गजरा-बेहरा, बकुल, ओबरी, तिलगुड, गन्नई, कसियारी, धुईया आदि टोलों मे सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है जबकि सिंगरौली स्टेशन के निकट बिजुल क्षेत्र में खनन-सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय की हरी झंडी मिलने के बाद माना जा रहा है कि काम तेजी से शुरू हो सकता है।

अब तक सिंगरौली कोलफील्ड में 300 मीटर गहराई तक के कोयले का खनन खुली खदानों के जरिये ही हो रहा है। इसमें नार्दर्न कोलफील्डस लिमिटेड हर साल औसतन 60 से 65 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करता है, किन्तु इससे अधिक गहराई से कोयला खनन के लिए फिलहाल निजी व सार्वजनिक क्षेत्र में कोई पहल नहीं हो की गयी थी।

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  • Web Title:सिंगरौली कोलफील्ड में अब अंडरग्राउंड माइनिंग