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आला साहबों को न मिले मोटा वेतनः खुर्शीद

आला साहबों को न मिले मोटा वेतनः खुर्शीद

इस समय सादगी पर जोर दे रही सरकार ने भारतीय उद्योग जगत को नसीहत दी है कि वह अपने आला साहबों को इतना मोटा वेतन और भत्ता न दें कि लोग उन्हें निर्लज्ज कहें। उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यकारियों के वेतन पर निर्णय शेयरधारकों को करना चाहिए।

कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतन भत्तों के स्तर के प्रति आंख नहीं मूंद सकती। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आज भारत में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह राजनीति में हो या राजनीति से बाहर, इतना उन्मुक्त हो गया है कि वह इस निर्लज्जता को अपना बुनियादी अधिकार बता सके।

खुर्शीद ने कहा कि सरकार को यह फैसला नहीं करना चाहिए कि किसे कितना वेतन मिलना चाहिए। खुर्शीद ने कहा हम स्थाई समिति का विचार लेकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा यह अब उन्हीं सदस्यों के सामने है जिसने सादगी का समर्थन किया है। हमें देखना होगा कि उनका क्या विचार है। देश के कुछ मुख्य कार्याधिकारियों का सालाना वेतन 50 करोड़ रुपये के करीब है जो देश की प्रतिव्यक्ति आय से 12,500 गुना अधिक है। मौजूदा कंपनी अधिनियम के तहत कंपनियों को अपने निदेशक मंडल की तन्ख्वाह एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ाने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती है।

खुर्शीद ने कहा कि मुख्य कार्याधिकारियों के वेतन पैकेज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा उद्योग को प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संकेत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशेष तौर पर तब जबकि हम सादगी की संस्कृति अपनाना और इसका संवर्धन करना चाहते हैं। खुर्शीद ने कहा कि अलग से कुछ भी नहीं हो सकता। हमें देखना होगा कि निदेशकों पर हमें क्या जिम्मेदारी डालनी होगी। हमने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं किया कि क्या अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक दो अलग-अलग लोगों को दिए जाने की अनिवार्यता पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वेतन किसी व्यक्ति की योग्यता और अनुभव पर निर्भर करना चाहिए। साथ ही कंपनी की विभिन्न समितियों की कार्ययोजना में पारदर्शिता होनी चाहिए। 

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