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सांस्कृतिक उत्सव: चहुंओर ‘मंगल ही मंगल’

तीन अक्टूबर की रात, पुलिस परेड ग्राउंड का मैदान, मैदान में सांस्कृतिक मंच, मंच पर लगे बैनर से झांकती अमर शहीद मंगल पांडेय की तस्वीर, रंग-बिरंगी रोशनी से आलोकित होता उनका प्रभामंडल और चहुंओर ‘मंगल ही मंगल’। अमर शहीद की याद में कलाकारों के थिरकते पांव व भाव-भंगिमाएं, वंदे मातरम की गूंज और मंच पर लहराता तिरंगा। कुछ ऐसा ही नजारा था ‘जरा याद करो कुर्बानी का।’

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने रंगकर्मियों व सुरसाधकों के कंठों से गूंजती अपने अमर शहीदों की गाथाएं न सिर्फ सुनीं बल्कि जोश व जज्बे में पूरी रात झूमते भी रहे। दूर-दराज से आये विभिन्न विधा के कलाकारों ने पूरे भावावेश में रोम-रोम को पुलकित कर देने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किये। लुप्त होती धोबिया व गोड़ऊ नृत्य की प्रस्तुति ने जहां परेड ग्राउंड में मौजूद विभिन्न वर्ग के लोगों को आनंदित किया वहीं देशभक्ति के जज्बे को सलाम भी किया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश के संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय ने दीप प्रज्जवलित कर किया। औपचारिकताओं के बाद स्थानीय कलाकार कन्हैया हरिपूरी ने ‘निमन हामारा लागे भाषा भोजपुरिया’ के माध्यम से भोजपुरी भाषा के प्रति सम्मान प्रस्तुत किया। शंभू राजभर ने भ्रूणहत्या पर चोट करते हुए ‘काहे खातिर माई आजू बनलू कसाई, अब जनि छुरिया चलाऊ ए माई’ गीत प्रस्तुत किया।

बिरहा गायक शंभू राजभर ने ‘बागी बलिया हो सानी बा जिलवा हमार’ के माध्यम से बलिया के बागी तेवर का बखान किया। वाराणसी के ‘डांस आन ह्वील’ के कलाकारों ने मौजूद दर्शकों की जमकर वाहवाही लूटी। हाथ में तिरंगा व दिल में देशभक्ति का जज्बा लिये इन कलाकारों ने ऐसी समां बांधा कि मैदान में चारों ओर बस ‘मंगल ही मंगल’ रहा।

देशबंधु पटना की टीम ने ‘झरनी नृत्य’ प्रस्तुत कर सबको आकर्षित किया। देर शाम को करीब साढ़े छह बजे शुरू हुआ देशभक्ति के रंग में रंगा यह कार्यक्रम समय के साथ ही परवान चढ़ता नजर आया।

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