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दोहरे हत्याकांड में छह को उम्रकैद

2003 में नैनीडांडा के खाल्यूडांडा में हुए दोहरे हत्याकांड के छह आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आजीवन कारावास के साथ ही 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी है। 23 मई 2003 में धूमाकोट तहसील के  खाल्यूडांडा निवासी गबर सिंह के दोनों नाबालिग पुत्रों रविंद्र प्रताप सिंह और मनमोहन सिंह की धारदार हथियारों से नृशंस हत्या कर लाशें को उन्हीं के कमरे में बिछे दीवान के अंदर डाल दिया गया था।

गबर सिंह ने राजस्व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी थी, जिसमें राम सिंह उर्फ डब्बू, सोबन सिंह और रणवीर सिंह को नामजद किया गया था। राजस्व पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या व डकैती  का मुकदमा दर्ज किया। बाद में मामला राजस्व पुलिस ने रेगुलर पुलिस को सौंपा गया। विवेचना में इस दोहरे हत्याकांड में  रामपाल बूचड़, मोहित और कुलदीप को भी शामिल पाया गया था।

रेगुलर पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एक अक्टूबर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड में गिरफ्तार सभी आरोपियों को दोषसिद्ध करार दिया। लेकिन सजा मुकर्र किए जाने से पहले बचाव पक्ष ने अदालत से दोषियों के लिए सजा कम करते हुए दस साल की सजा की गुजारिश की। इसके लिए बचाव पक्ष ने कुछ नजीरें भी पेश की थी। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि रियरिस्ट आफ दी रियर की श्रेणी मे आता है, जिसमें मृत्यु दंड से कम सजा नहीं हो सकती। 

शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्याकांड में दोषी पाए सभी छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 50-50 हजार का अर्थदंड  का फैसला दिया। अपने फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इसे रियरिस्ट आफ द रियर मानने से इंकार किया है। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता केपी डंगवाल और सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेम वल्लभ पंत ने पैरवी की थी।

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