DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पदक का रंग बदलने की कोशिश करूंगा

कुछ साल पहले तक भिवानी के कालूवास गांव का शर्मीला सा मुक्केबाज विजेंदर आज भारतीय खेलों का पोस्टर ब्वॉय बन गया है। सफलता तो लगातार परवान चढ़ ही रही है, साथ ही खेलों की सफलता को कैसे भुनाया जाता है, इससे भी वे अच्छी तरह वाकिफ हैं। यही कारण है कि आज वे टेलीविजन के ज्यादातर रियलिटी शो में सेलिब्रेटी बने नज़र आते हैं। विजेंदर की इन्ही व्यस्तताओं के बीच उनसे रू-ब-रू हुए हमारे प्रमुख संवाददाता संजीव गर्ग-

ओलंपिक पदक के बाद विश्व चैंपियनशिप में पदक और रैंकिंग में नम्बर वन। खुद को कैसे फोकस रखते हैं?
मैं आज जो कुछ भी हूं, मुक्केबाजी की वजह से ही हूं। मुक्केबाजी मेरा पहला प्यार है और हमेशा रहेगा। मुझे पता है कि अगर मैं मुक्केबाजी में अच्छा करता रहूंगा तो बाकी सब खुद ब खुद अच्छा होता जाएगा। यही कारण था कि मैंने कभी भी अपनी ट्रेनिंग मिस नहीं की। यदि मुझे शूटिंग वगैरह के लिए कभी मुम्बई वगैरह जाना भी पड़ता था तो हमेशा मेरे साथ एक कोच जाता था जो कि मुझे रेगुलर ट्रेनिंग कराता रहता था। मैंने खेल के प्रति अपने आप को हमेशा फोकस रखा।

बीजिंग ओलंपिक के बाद आप लगभग आठ महीने रिंग से दूर रहे। यहां तक कहा गया कि विजेंदर अब शायद ही मुक्केबाजी रिंग में दोबारा उतरें?
सफलता मिलती है तो दुश्मन भी बहुत खड़े हो जाते हैं। खिलाड़ी अच्छा न करे तो उसकी खिंचाई शुरू हो जाती है। खिलाड़ी को चोट लग जाए तो समझ लिया जाता है, अब उसमें दम नहीं। मुश्किल समय में हमेशा साथ देना चाहिए। लोगों को भी समझना चाहिए कि हम आदमी हैं, कोई मशीन नहीं। 

बीजिंग ओलंपिक में भारत के तीन खिलाड़ियों ने तीन मैडल जीते थे। लेकिन बॉलीवुड और कॉरपोरेट
में आपने जितनी पहचान बनाई, उतनी अन्य दो नहीं बना सके?
आपको अपनी मार्केटिंग करने की कला खुद सीखनी होती है। मुक्केबाज जीवन में जिस तरह की कठिनाइयों से रू-ब-रू होते हैं, वैसी मुश्किलें मैंने भी देखी हैं। फिर मैं मुक्केबाजी की बारीकियों से भी अच्छी तरह वाकिफ हूं। यही कारण है कि मैंने बॉलीवुड और कॉरपोरेट के साथ तालमेल बिठाते हुए कभी भी अपने मुक्केबाजी के पार्ट को जाया नहीं होने दिया। समय के साथ तालमेल बिठाना भी अपने आप में एक कला है।

अब सुनने में आ रहा है कि आप बॉलीवुड की किसी फिल्म में भी काम करने जा रहे हैं?
ऑफर तो बहुत पहले से हैं। कुछ समय पहले दक्षिण भारत के एक निर्माता ने सम्पर्क किया था। वे एक   एक्शन फिल्म करना चाहते हैं। इस फिल्म में जो रोल मुझे देने की बात है, वह मेरे खेल से काफी मेल खाता है। मार्शल आर्ट एक्शन फिल्म है। वैसे अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है।

आपकी सफलता ने भारतीय मुक्केबाजी की तस्वीर बदल दी है। आप इसे कैसे देखते हैं?
वाकई विश्व मुक्केबाजी में अब भारत की एक अलग पहचान बन गई है। एक समय था, जब हमारे मुक्केबाज कुछ जाने-माने देशों के मुक्केबाजों के खिलाफ फाइट से पहले ही खुद को हारा हुआ मान बैठते थे। अब इस स्थिति में काफी बदलाव हुआ है। अब शायद ही कोई ऐसा टूर्नामेंट हो जहां से हमारे मुक्केबाज खाली हाथ लौटते हों।  

आपका सफर कांस्य पर आ कर रुक जाता है। आप कांस्य से आगे क्यों नहीं बढ़ पाए?
इस बात को लेकर मैं खुद भी परेशान हूं। इस बार विश्व चैंपियनशिप में तो मुझे पूरा विश्वास था कि पदक के इस रंग को हर हाल में बदल दूंगा। यहां तक कि दो माह पहले ही मैं चीन में एशियाई चैंपियनशिप में भी अतोव को हरा चुका था। फिर भी सेमीफाइनल में मैं उससे हार गया। भविष्य में ऐसा नहीं होगा। दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों और लंदन ओलंपिक में मैं पदक के इस रंग को बदलने की हरसंभव कोशिश करूंगा।

आपकी सफलता का असर परिवार पर कितना हुआ है?
पिताजी आज भी हरियाणा रोडवेज में काम करते हैं। हां, मेरी सफलता से परिवार वालों का मान-सम्मान काफी बढ़ गया है। आज आस-पास के लोग उनसे सलाह-मशविरा करने आते हैं। वैसे मैंने भी मुक्केबाजी से जो मान, सम्मान और पैसा कमाया वह सब मेरे परिवार का ही है।

हाल ही में परसेप्ट से आपने कई करोड़ रुपये की डील की। आपको पुरानी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कम्पनी आईओएस ने आपको कोर्ट में घसीटने की बात भी कही। इस बारे में आपका क्या कहना है?
इसे लेकर मैं थोड़ा अपसेट जरूर हूं, लेकिन जल्द ही सब कुछ सुलझ जाएगा। वैसे मुझे जहां से भी अच्छा ऑफर मिलेगा, मैं तो उसी के लिए काम करूंगा। मैं क्या कोई भी ऐसा ही करेगा। अगर आईओएस मुझे परसेप्ट से अच्छा ऑफर दे देता है तो मुझे उसके साथ काम करने में भी कोई गुरेज नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पदक का रंग बदलने की कोशिश करूंगा