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शोध प्रवेश पर छात्रों में असमंजस

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शोध प्रवेश पर कायम गतिरोध एवं राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय में शोध प्रवेश पर रोक लग जाने से शोध करने के इच्छुक छात्र असमंजस में हैं। इविवि में संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) पर एकेडमिक काउंसिल ने प्रो. वीसी पाण्डेय की अगुवाई में कमेटी गठित की है उसमें व्याप्त विसंगतियों को दूर करेगी। कमेटी की रिपोर्ट कुलपति को मिलने के बाद ही इसके लिए नए निदेशक की नियुक्ति हो पाएगी।

मुक्त विवि में चल रही शोध प्रवेश प्रक्रिया पर भी मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने अधिसूचना जारी कर दूरस्थ शिक्षा वाले संस्थानों से पीएचडी करने पर रोक लगा दी है। ऐसे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इस वर्ष परास्नातक करने वाले छात्र-छात्रएँ प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। इविवि के केन्द्रीय विवि बनने के बाद यहाँ शोध में प्रवेश प्रक्रिया पटरी से उतर गई है। जब से विवि में प्रवेश परीक्षा शुरू हुई प्रवेश पूरा होने में ही साल भर से अधिक का समय लग रहा है।

इविवि में हर वर्ष लगभग 250 से 300 छात्रों का प्रवेश शोध में होता रहा है। इसके साथ ही विवि के रिसर्च सेंटर गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, शीलाधर इंस्टीटय़ूट में भी शोध कार्य के लिए प्रवेश होता है। मुक्त विवि में भी इतने ही छात्रों का प्रवेश होता है।

इविवि में समय से प्रवेश न होने के कारण छात्रवासों में रहने वाले छात्रों पर बेदखली की तलवार लटक रही है। छात्रों का कहना है कि देश के सभी केन्द्रीय विवि में रिसर्च में प्रवेश कार्य पूरा हो गया है। हर विवि का एकेडमिक कलेण्डर है, उसी के अनुसार आवेदन पत्र निकलता है और परीक्षा के बाद छात्रों की डीपीसी एवं आरडीसी करके प्रवेश दे दिया जाता है।

इविवि में विभागों की मनमानी के  कारण सितम्बर में शोध प्रवेश पूरा हुआ है। विवि में पिछले वर्ष सितम्बर में प्रवेश के लिए आवेदन फार्म आ गया था परन्तु इस वर्ष यह परीक्षा कैसे होगी, कौन निदेशक बनेगा, यही तय नहीं हो पाया है। इस बारे में कुलपति प्रो. आरजी हष्रे का कहना है कि प्रो. वीसी पाण्डेय की रिपोर्ट मिलते ही निदेशक की नियुक्ति कर दी जाएगी।

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