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यूपी में खिलवाड़ हो गया बापू तेरे हरी के जनों के संग

उत्तर प्रदेश में सिर पर मैला ढोने के घृणित पेशे में लगे लोगों तादाद और उनके पुर्नवास का मुद्दा विवादों  में घिर गया है। ऐसे लोगों की पहचान और उनके पुर्नवास की महत्वाकांक्षी योजना पर संकलित आँकड़ों पर उंगली उठने लगी है । केन्द्र के निर्देश पर चार साल पहले हुए सर्वे में  महज 20 हजार 329 लोग अपराध घोषित हो चुके इस पेशे में लिप्त पाए गए।  फिर स्थलीय सत्यापन हुआ तो  9 हजार 426  लोग वाकई पेशे में लिप्त मिले।

चार वर्षो में संकलित इन आँकड़ों पर अमल की बारी आई तो रिपोर्ट लगी कि इनमें से 5 हजार 870 लोग  या तो मर गए, या दूसरे राज्यों में चले गए और या फिर स्वावलम्बी बन गए और सरकारी योजना का लाभ लेने से मना कर दिया।  कुछ ऐसी ही रिपोर्ट राज्य अनुसूचित वित्त विकास निगम और राज्य नगरीय विकास अभिकरण सूडा जैसी जिम्मेदार एजेंसियों एजेंसियों की तरफ से केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रलय को भेज भी दी गई है।

मंत्रलय ने 30 सितम्बर 2009 तक इस योजना के क्रियान्वयन की फाइनल रिपोर्ट माँगी थी।  राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दुर्गेश वाल्मीकि, सफाई कर्मी नेता श्याम लाल वाल्मीकि सरीखे उंगली उठाते हुए कहते हैं कि उक्त सर्वे पूरी तरह झूठा है, फर्जी आँकड़े पेश किए गए हैं। इन दोनों के मुताबिक आज भी प्रदेश में हजारों नहीं लाखों परिवार सिर पर मैला ढोने का घृणित पेशा करने पर मजबूर हैं।

जबकि केन्द्र सरकार ने कानून बनाकर इसे अपराध घोषित कर दिया है।  यह दोनों फिर से सर्वे करवाए जाने की मांग करते हुए कहते हैं कि इस पेशे में महिलाएं और बच्चों भी लगे हैं जो असमय टीबी और अन्य खतरनाक बीमारियों का शिकार होते हैं।

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