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टेम्पो के फैसले पर कुछ इधर तो कुछ उधर

शहर में टेम्पो पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर लोगों ने अलग-अलग राय दी। बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था के मुद्दे पर लोगों ने अथॉरिटी व परिवहन के इस कदम की सराहना की। वहीं कुछ लोगों ने बसों का परिचालन सही न होने पर नाराजगी जताई है। कुछ लोगों ने भीड़भाड़ वाली बसों में सफर करना बेहद कठिन बताया।


विनोद कुमार झा : अच्छा हुआ। टेम्पो वाले बीच रोड़ पर खड़ा कर देते हैं। पीछे वालों की परवाह नहीं करते। टेम्पो एक लाइन से कभी नहीं खड़े होते।

रमेश शर्मा : टेम्पो बंद हो गए तो क्या? हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार की मर्जी है। सरकार की मर्जी के खिलाफ कर भी क्या सकते हैं? 10 मिनट बस का इंतजार कर लेगें।

अनुज : टेम्पो बंद कर देने से हालत नहीं सुधरेगी, परेशानी बढ़ गई है। गर्मी के मौसम में धूप में खड़ा होना पड़ता है। सरकार को क्या?

नेहा : मैं टेम्पो वालों के साथ हड़ताल में शामिल होने चाहती हूं। टेम्पो बंद होने से मै स्कूल समय से नही पहुंच रही। टीचर की डांट खानी पड़ रही है।

आलोक कुमार मोदी : बसें एक ही रूट पर चलेंगी सेक्टर के अन्दर नहीं। अगर बसों को सेक्टरों के अन्दर चलाया जाए तो पैदल चलने से बच जाएगें और समय भी बच जाएगा। बसें सही टाइम पर मिलें, तो टेम्पो की जरूरत नहीं है।


विवेक पांडे : एक या दो किलोमीटर जाने के लिए बसों का लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। रिक्शे वाले ज्यादा किराया लेते हैं। रोज रिक्शे में सफर नहीं कर सकते।

संजिदा : टेम्पो के बंद होने से बसों की भीड़ ङोलनी पड़ रही है। पीक ऑवर में भीड़ ज्यादा होने के कारण बस नहीं मिल पाती। बस स्टॉप पर एक-एक घंटे खड़े रहना पड़ रहा है।

निशा सिंह : रोजाना आने जाने में समय और पैसा बर्बाद होगा। पीली बसें एक साथ तीन-तीन आती हैं,कभी-कभी घंटों खड़े रहने पर भी बस नहीं आती।

विपिन चतुर्वेदी : आधे घंटे से बस का इंतजार कर रहा हूँ। टेम्पो चल रहे होते तो अब तक घर पहुंच गया होता

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