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मुख्यमंत्री डा.निशंक ने सौ दिन के कार्यकाल में कई मील के पत्थर

उत्तरांखड के मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निंशक ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में विकास और नियोजन के कई मुकाम हासिल किए हैं।

राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री डा. निशंक कल एक सौ दिन का कार्यकाल पूरा करेंगे। इस दौरान उन्होंने राज्य में एक और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कार्यवाही शुरु की तो दूसरी ओर आम आदमी से सीधे संवाद स्थापित कर लोगो को भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि वह आम लोगो के मुख्यमंत्री हैं।

उन्होंने सत्ता संभालते ही जनता की कठिनाइयो को समझा और नेतृत्व को जनता से जोड़ा। उन्होंने बिजली और पानी जैसी समस्याओं को सत्ता संभालने के 24घंटे के अंदर ही दुरस्त करने का काम शुरु कर दिया।

सरकारी तंत्र में आए ठहराव को कसने का काम मुख्यमंत्री ने पहली प्राथमिकता में रखा और अधिकारियों को स्पष्ट बता दिया कि उन्हें वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर लोगों के पास पहुंचना है। जिलाधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार बनाया वहीं मंत्रियों को जिले का प्रभारी बनाकर योजनाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी तय की।
 
राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि प्रदेश के सीमित संसाधनों को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डा. निशंक लगातार प्रयत्नशील हैं। एक ओर केन्द्रीय योजना आयोग से अब तक की सबसे अधिक 5575 करोड़ रुपए की योजना मंजूर कराई वहीं पहली बार कुम्भ के लिए केन्द्र सरकार से 400 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता हासिल करने में भी सफल रहे। महाकुम्भ में देश और दुनिया से पांच करोड़ लोगों के आने की उम्मीद को देखते हुए मुख्यमंत्री व्यवस्थाओ पर निरन्तर नजर रखे हुए हैं।
 
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पानी का बेहतर उपयोग के लिए मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण कार्य शुरु किए। जड़ी बूटी को अर्थव्यवस्था का आधार बनाने और छोटी छोटी बिजली परियोजनाए बनाकर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम शुरु किया गया है। मुख्यमंत्री का एक विजन है जिसके तहत 2020 तक उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य बन जाए जो हर दृष्टि से खुशहाल हो जहां लोग आने को लालायित हो और योजनाएं का लाभ हर छोर तक पहुंचे। इस दिशा में पर्यटन पर्यावरण संरक्षण ऊर्जा जडीबूटी कुटीर उद्योग बेहतर मानव संसाधन गंगा स्वच्छता अभियान जैसे विषयों पर भी कार्य शुरु कर दिया है।
 
डा. निशंक के सामने कई चुनैतियां भी हैं। एक ओर गैरसेण को राजधानी बनाने का मुददा दूसरी ओर आंदोलनकारियों के मान सम्मान का सवाल।भ्रष्टाचार से मुकाबला और सीमित संसाधनों के चलते विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाना और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना बडी चुनौती है।
 
छठवें वेतन आयोग से दो हजार करोड़ रुपए के वित्तीय भार के बावजूद उन्होंने इस वर्ष बजट में कोई नया कर नहीं लगाया और रोजमर्रा की जरुरतों पर वेट को भी खत्म कर दिया। पहली बार बजट में महिलाओं के लिए 1205 करोड़ रुपए की व्यवस्था की और व्यापारियों की समस्याओ के लिए भी व्यापार मित्र समिति गठित की। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ देने के साथ ही शिक्षकों का मानदेय बढाया और खिलाडि़यों की पुरस्कार राशि निर्धारित की।

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