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ले गई दिल गुड़िया जापान की

ले गई दिल गुड़िया जापान की

जापानी समाज में पिछले कुछ वर्षो से एक नई जीवनशैली अपनी जगह बना रही है। इस अति विकसित देश के कई एकाकी नौजवान इंसानी जीवनसाथी के बजय रबर के गुड्डे-गुड़ियाओं के साथ रहना पसंद करते हैं। उनकी दलील है कि हाड़-मांस के जीवनसाथी पर भरोसा नहीं किया ज सकता, वह धोखा दे सकता है। नकली जीवनसाथी को चाहे जैसे बरतो, कभी शिकायत नहीं करता। जहिर है यह प्रवृत्ति व्यक्तिवादी अति की उपज है और इसे स्वीकार करना खासा दिक्कततलब है। लेकिन इतना तो मानना ही पड़ेगा कि अब इंसान अप्राकृतिक उत्पादों या मशीनों के साथ बिल्कुल नए किस्म के रिश्तों की ओर बढ़ रहा है। 45 वर्षीय इंजीनियर ताबो ऐसी ही कई रबर संगिनियों के साथ जीवन बिताते हैं। वह कहते हैं, ‘सचमुच की लड़की गच्चा देती है और कई बार बेवफा साबित होती है। आप कह नहीं सकते कब नाज-रखरे दिखाने लगे। लेकिन ये गुड़ियांएं ऐसा कभी नहीं करतीं। वे सौ फीसदी मेरी हैं।’ असल महिलाओं को अलविदा कर चुके ताबो जैसे लोगों की संख्या जपान में धीमे-धीमे बढ़ रही है।

फिलहाल जीवनसाथी की जगह लेने वाली नकली गुड़ियाएं बाहरी रूप-रंग में इंसानों जैसी हैं। इंसानों जैसे अंग-प्रत्यंग बनाने के लिए उन पर अच्छा-खासा शोध व पैसा लगाया गया है। ओरिएंटल इंडस्ट्री कं. द्वारा बनाई गई कुछ गुड़ियाओं का शरीर कम से कम तीन दजर्न जगहों पर मुड़ सकता है। हालांकि उनके साथ इंसानी रिश्ता अभी दैहिक स्तर से आगे नहीं बढ़ा है। लेकिन वह दिन दूर नहीं जब इनमें कंप्यूटरी संवेदनशीलता का समावेश किया जाने लगेगा। तब ये इंसानों की तरह हंसेंगी-बोलेंगी और अपने ‘मालिक’ के साथ सहज संवाद करती नजर आएंगी। ये रोबोटिक गुड़ियाएं बिना थके तमाम घरेलू काम-काम निपटाएंगी और शाम को मालिक के लौटने पर उसके पसंदीदा ढंग से स्वागत करेंगी। इंसानों की तरह उनका तयशुदा व्यक्तित्व नहीं होगा बल्कि जरूरत और पसंद के हिसाब से उसे बदला जा सकेगा। उसके रंग-रूप और बर्ताव को भी चाहे जब बदल पाना संभव होगा। संभव है बहुत से लोग नौकरानी के बतौर ऐसी गुड़िया को घर में रखना पसंद करें तो दूसरे जीवनसाथी बनाने में भी ऐतराज नहीं करेंगे। हालांकि मशीन होने की वजह से इनमें आनुवांशिक विरासत नहीं होगी लेकिन कौन जाने भविष्य में इन्हें अपने मालिक का ‘क्लोन’ पैदा करने की सामथ्र्य दे दी जाए। कहना मुश्किल है कि इंसान और मशीन के संयोग से पैदा हुई भविष्य की ऐसी नस्लों को किस नाम से पुकारा जएगा!

बहरहाल, जानवरों को पालतू बनाने और उनके साथ करीबी रिश्ते कायम करने के बाद इंसान मशीनों के साथ नए किस्म के रिश्तों की ओर बढ़ रहा है। मशीनों की गुलामी की फंतासियां अब पुरानी पड़ गई हैं। नई खबर यह है कि मशीनें अब इंसानी व्यक्तित्व का हिस्सा बन रही हैं और मशीनों के इंसानों जैसा बनने का वक्त अब आ गया है।

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