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युवाओं को जगाती "वेकअप सिड"

युवाओं को जगाती "वेकअप सिड"

सितारे :  रणबीर कपूर, कोंकणा सेन शर्मा, अनुपम खेर, सुप्रिया पाठक, राहुल खन्ना
निर्माता :  करण जौहर और हीरू जौहर / यूटीवी मोशन पिक्चर्स और धर्मा प्रोडक्शंस
निर्देशक और लेखक : अयान मुखर्जी
संवाद :  निरंजन आयंगर
गीत :  जावेद अख्तर
संगीत : शंकर-एहसान-लॉय और अमित त्रिवेदी
कहानी : सिद्धार्थ मेहरा उर्फ सिड (रणबीर कपूर) की जिंदगी उसके कॉलेज के दोस्त लक्ष्मी (शिखा तलसानिया) और ऋषि (नमित दास) के आस-पास ही घूमती है। रात में पार्टीज और दिन में दोस्तों संग शॉपिंग सिड की रुटीन लाइफ है। लेकिन जब एक दिन सिड क्लास में फेल हो जाता है तो उसकी जिंदगी में एक यू-टर्न आता है। उसके पिता राम मेहरा (अनुपम खेर) उसे अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराते हैं तो सिड घर छोड़कर चला जाता है। ऐसे में उसका साथ देती है आइशा (कोंकणा सेन शर्मा) जो खुद मुंबई में अपनी जिंदगी का लक्ष्य साधने आयी है। बचपन से ऐश और आराम की जिंदगी बिताने वाले सिड के लिए आइशा के एक कमरे की जिंदगी थोड़ी मुश्किल पड़ती है, लेकिन वह उसमें खुद को ढालने की पूरी कोशिश करता है। एक दिन आइशा को नौकरी मिल जती है तो सिड को भी लगता है कि उसे कुछ करना चाहिये। अचानक एक दिन उसका एक शौक उसकी जिंदगी बदल देता है। 

निर्देशन : एक निर्माता के रूप में करण जौहर ने अयान मुखर्जी पर एक बेहद सरल कहानी के साथ जो प्रयोग किया है, उसमें वह सफल नजर आते हैं। इसकी वजह है अयान का सधा हुआ निर्देशन, जो दर्शकों को सिड के किरदार को अंत तक समझने पर मजबूर करता है। अपने लेखन और निर्देशन के माध्यम से अयान ने सिड के किरदार को इस रोचक अंदाज में बुना है कि वह संपन्न परिवार का होने के बावजूद आम इंसान लगता है। सिड का किरदार फिल्म ‘लक्ष्य’ के करण शेरगिल जैसा है, जिसे लगता है कि अगर उसके पिता के पास सब कुछ है तो उसे क्या करने की जरूरत है। 

अभिनय : दो वर्षो में यह रणबीर की मात्र तीसरी फिल्म है, जिसमें उन्होंने अपनी अब तक की बेस्ट परफॉरमेंस दी है। उनकी एक्टिंग देखकर लगता है कि सिड के किरदार के लिए वही उपयुक्त हैं। उन्होंने कोंकणा सेन, सुप्रिया पाठक और अनुपम खेर जसे सितारों के सामने खुद को काफी सहजता से पेश किया और बीच-बीच में कई जगह दर्शकों को हंसाया भी। 
 
गीत-संगीत : टाइटल ट्रैक ‘वेकअप सिड’ का अच्छा है। जवेद अख्तर के साथ शंकर-अहसान-लॉय की जोड़ी अच्छी जमती है, लेकिन जिन चार-पांच छोटे-छोटे ट्रैक्स पर अमित त्रिवेदी ने काम किया है, वे फिल्म की जन हैं। कविता सेठ की आवाज में ‘इकतारा’ गीत काफी अच्छा बन पड़ा है।
क्या है खास : कई ऐसे दृश्य हैं, जो दिल को छू लेते हैं। नए घर की सजावट, सिड का अपने पिता के पास जाना, नौकरी मिलना और कोंकणा का झल्लाना।
क्या है बकवास : क्लाईमैक्स से पहले करीब 10 मिनट के लिए ऐसा लगा कि फिल्म को खींचा जा रहा है।
पंचलाइन : यह फिल्म बहुत सारे सिड को जगाने का काम कर सकती है। आज के युवाओं को जरूर देखनी चाहिये।

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  • Web Title:युवाओं को जगाती "वेकअप सिड"