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आज की श्रवण कुमार

आज की श्रवण कुमार

स्टार प्लस ने ‘श्रद्धा-एक बेटी का विश्वास बना माता-पिता की आस’ शो शुरू किया है। यह धारावाहिक पौराणिक चरित्र श्रवण कुमार का नारी रूपांतरण है। कहानी का ताना-बाना वर्तमान समय और आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में बुना गया है। दर्शकों के साथ भावनात्मक सूत्र में बंधने के लिए तैयार श्रद्धा एक असाधारण लड़की और उसके धैर्य एवं विश्वास की कहानी है। इस स्वार्थी दुनिया में उसे अपने माता-पिता की उम्मीदों एवं सपनों को पूरा करने का रास्ता ढूंढ़ना पड़ता है। विषम परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने वाली श्रद्धा का चरित्र महान है। वह अपने माता-पिता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्थन तथा स्नेह की भावना प्रदर्शित करती हुई विश्वास से परिपूर्ण जीवन जीती है।

श्रद्धा कठिनाइयों और चुनौतियों को स्वीकार करती है, खासकर जब उसके तीन भाई अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं। वह अपने बीमार पिता और नेत्रहीन मां की चार धामों की यात्रा के स्वप्न को महसूस करती है और उनकी इस अंतिम इच्छा को पूर्ण करने के लिए सारी कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ती है।
इस शो के बारे में सिद्धांत सिनेविजन के निर्माता मनीष आर. गोस्वामी कहते हैं, ‘मैं समझता हूं कि आज परिवार की बेटियां हर प्रकार से बेटों के समकक्ष हैं। श्रद्धा के माध्यम से एक ऐसे चरित्र की प्रस्तुति की ज रही है, जो अपने भाइयों के मुंह मोड़ लेने के बावजूद अपने माता-पिता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को महसूस करती है और उसे पूरा करने के लिए गहरी प्रतिबद्धता दिखाती है।’

इस बारे में स्टार इंडिया के विवेक का कहना है, ‘स्टार प्लस पर हम ऐसी नई परिकल्पनाओं एवं विचारों में विश्वास रखते हैं, जिसमें भावनात्मकता एवं रिश्तों की व्यापक विविधता हो और जिसमें वर्तमान भारत की वास्तविकता और आकांक्षाओं की प्रतिध्वनि सुनाई दे। श्रद्धा श्रवण कुमार के चरित्र से भली-भांति परिचित है और श्रद्धा इसका नारी रूपांतरण है।’

 लक्ष्मी जयसवाल (सुकन्या कुलकर्णी द्वारा अभिनीत)
जगदीश जयसवाल की पत्नी लक्ष्मी एक छोटे शहर की महिला है, जिनका स्वभाव मधुर, सरल, निदरेष और बहुत धार्मिक है। वह पूरी जिंदगी एक बेहद जिम्मेदार गृहिणी रही हैं। उन्होंने जीवन के हर कदम पर अपने पति जगदीश का साथ दिया है। वह  सभी विषम परिस्थितियों में उनकी सहायता और समर्थन करती रही हैं। जब जगदीश अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में व्यस्त थे तो लक्ष्मी ने सभी घरेलू जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर उठाया। 

जगदीश जयसवाल ( सुधीर दलवी द्वारा अभिनीत)
परिवार के मुखिया हैं। वे बहुत सरल स्वभाव के हैं और उनकी आवश्यकतायें बहुत सीमित हैं। जगदीश जयसवाल सबसे बड़े बेटे हैं तथा अब परिवार के वरिष्ठतम सदस्य हैं। वह एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ित हैं।
जीवन के प्रत्येक स्तर पर कठिनाइयों एवं समस्याओं का मुकाबला करते-करते तमाम उम्र बीतती चली गई।

सितारे बोले
सारा खान : मैं एक लड़की के रूप में स्वयं को बहुत गौरवान्वित महसूस करती हूं तथा मेरे माता-पिता भी मेरे ऊपर गर्व करते हैं। परिवार में सबसे बड़ी होने के कारण मैं काफी दुलारी हूं और परिवार में मेरे साथ एक पुत्र के समान व्यवहार किया जता है, न कि एक पुत्री के समान। मेरे माता-पिता ने मेरी क्षमताओं को कभी भी कमतर करके नहीं आंका। वे मेरे सबसे बड़े समर्थक रहे हैं और उन्होंने मुङो मेरे सपनों को पूरा करने के लिए सदैव प्रोत्साहित किया है। यह उनका मेरे प्रति अगाध विश्वास तथा प्रेम ही है, जिससे मुङो इस अतिशय प्रतिस्पर्धी पेशे में निरंतर आगे बढ़ने की ऊज्र मिलती रही है। 

नेहा जनपंडित : यदि मेरे माता-पिता मेरे साथ नहीं होते तो मैं कभी इस उद्योग में नहीं आ पाती। मैं अपनी सारी सफलता का श्रेय उन्हें देती हूं। इकलौती पुत्री होने के नाते वे सदैव ही मुङो सुरक्षा कवच प्रदान करते रहे।  वे सदैव ही मेरे आधार रहे हैं और वे इस बात में गहन विश्वास रखते हैं कि मैं बालिका होने की भ्रांति को तोड़ने में अवश्य सफल हो सकती हूं। चाहे मेरी शिक्षा का प्रश्न रहा हो अथवा करियर का, मेरे माता-पिता ने मुङो एक पुत्र से बढ़ कर समर्थन प्रदान किया है। मैं अपने माता-पिता की शक्ति हूं और सदैव ही उनके मस्तक को ऊंचा रखने का प्रयास करूंगी। यह चरित्र एक आज्ञाकारी पुत्री का शानदार उदाहरण है और यह मुझे वास्तविक जीवन में भी ऐसी ही भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

पारुल चौहान : श्रद्धा नारी शक्ति का सशक्त चित्रण है। आज भी ऐसे परिवार हैं, जो बालिका को स्वीकार नहीं करते और उसे एक भार के समान मानते हैं। मैं अपने माता-पिता की इकलौती पुत्री हूं और एक रूढ़िवादी परिवार से संबद्ध हूं। लेकिन इससे उनके मेरे प्रति प्रेम और दुलार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। आज मैं न सिर्फ उनके लिये एक भावनात्मक समर्थन का सबब हूं,  बल्कि मुझे यह कहते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि आज मैं अपने पूरे परिवार की आधार स्तंभ भी हूं।

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