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श्रीलंका उच्चयोग पर हमला, भारत ने खेद जताया

श्रीलंका उच्चयोग पर हमला, भारत ने खेद जताया

नई दिल्ली के उच्च सुरक्षा वाले इलाके में स्थित श्रीलंकाई उच्चयोग पर शुक्रवार को अपराह्न् 15 से 20 की संख्या में तमिलों के एक समूह ने धावा बोल दिया। यह समूह श्रीलंका विरोधी नारे लगा रहा था। भारत सरकार ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया है और उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

विदेश मंत्रलय की ओर से यहां कहा गया है कि हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा खेद व्यक्त करते हैं, जिसके तहत एक राजनयिक मिशन को हिंसक कार्रवाई का निशाना बनाया गया। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों ने अपना काम शुरू कर दिया है और उच्चयोग के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मंत्रालय ने कहा है कि इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

अपने तरह की यह पहली घटना अपराह्न् लगभग 2.30 बजे घटी। श्रीलंकाई उच्चयोग के अधिकारियों ने इस घटना पर आश्चर्य व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। श्रीलंकाई उच्चयोग में प्रथम सचिव एस.गुणरत्ने ने कहा कि हम चकित हैं। हमने इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से बात की है। हम इस बारे में मंत्रालय को लिखित में भी भेज रहे हैं।

तमिलों का यह समूह चाणक्यपुरी इलाके में स्थित उच्चयोग की दीवार फांद कर अंदर पहुंच गया और वहां परिसर में रखे फूलों के 10-15 गमले तोड़ डाले। गुणरत्ने ने कहा कि अपराह्न् में लगभग 40-50 लोग वहां श्रीलंका विरोधी नारे लगा रहे थे। वे तमिलों जैसे लग रहे थे और श्रीलंका सरकार के विरोध में नारे लिखी तख्तियां हाथ में लिए हुए थे।

गुणरत्ने ने कहा कि इसी दौरान लगभग 10 लोग मुख्य द्वार को फांद कर अंदर पहुंच गए। छुट्टी का दिन होने के कारण वहां आसपास कोई कर्मचारी नहीं था। उन्होंने नारे लगाए और फूलों के कुछ गमले तोड़ डाले। गुणरत्ने ने कहा कि श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने उन पर काबू पा लिया। लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली) एस.दास ने बताया कि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ है। यह सब मुश्किल से दो मिनट में घट गया। पुलिस के हरकत में आने के पहले ही वे फरार हो गए थे। इस कारण किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका।

दास ने कहा कि ये लोग तमिल थे और वे श्रीलंका में तमिलों का समर्थन कर रहे थे। वे पूरी तरह तैयार थे और समाचार चैनल के संवाददाताओं के साथ वहां पहुंचे थे। हम समाचार चैनल से वीडियो फुटेज मंगा रहे हैं ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।

ज्ञात हो कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ श्रीलंका में युद्ध की समाप्ति के बाद वहां शिविरों में पनाह लिए लगभग 300,000 तमिल नागरिकों के पुनर्वास का मुद्दा भारतीय तमिलों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। कोलंबो ने नई दिल्ली को भरोसा दिलाया है कि तमिलों का पुनर्वास यथासंभव जल्द से जल्द कर दिया जाएगा।

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