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ये हैं निवेश बचत के कारगर विकल्प

भारत के ज्यादातर परंपरागत निवेशकों के लिए परफैक्ट पोर्टफोलियो का निर्माण केवल शेयर और म्यूचुअल फंड के सही मिश्रण से ही होता है। आखिर किसी तेज़ी के मार्केट में इन्हीं से सबसे अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन ऐसा भी नहीं कि इन दो तरीकों के अलावा निवेश का ऐसा पक्का ज़रिया कोई और नहीं है। क्या आपने कभी वैकल्पिक संपत्तियों जैसे सोना, आर्ट, डाक टिकट और सिक्कों में निवेश करने पर विचार किया है?

कोई भी अच्छा फाइनेंस मैनेजर आपको बता देगा कि ये आपके पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने में मदद करते हैं, और इससे भी अहम बात ये कि आपको मार्केट के भीषण जोखिम से बचा देते हैं। तो आइडिया यह है कि परंपरागत निवेश से एक बार अपना बेस पोर्टफोलियो बना लेने के बाद आपको इसे शेयर और बॉण्ड मार्केट के उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचाने के लिए डाइवर्सिफाई जरूर करना चाहिए।

वैकल्पिक निवेश
जब हम निवेश के विकल्पों की बात करते हैं, तो जेहन में एकदम शेयर, फिक्स इनकम देने वाले इंस्ट्रुमेंट, इंडस्ट्रियल या एग्री-कमोडिटी और करैंसी का खयाल आता है। लेकिन अगर आप चाहें, तो गैर-परंपरागत संपत्तियों (जैसे रियल एस्टेट, सोना-चांदी और जवाहरात, एंटीक्स, कलाकृतियां) और संग्रहण योग्य आइटम (जैसे कालीन, शॉल, सिक्के, डाक टिकट, फाइन वाइन्स वगैरह) में भी निवेश कर सकते हैं। परंपरागत संपत्तियों में निवेश के होने वाले नफे -नुकसान का इनमें किए गए निवेश से कोई सीधा संबंध नहीं होता, बल्कि अच्छा और सुरक्षित रिटर्न मिलने की कहीं ज्यादा संभावना होती है। इसे यूं भी समझ सकते हैं: जैसे किसी मकान को अच्छी और मजबूत नींव की जरूरत होती है, वैसे ही आपके पोर्टफोलियो को भी बड़े पूंजीगत शेयर या डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड और हाई-क्वालिटी फिक्स इनकम एक्सपोज़र के सही संतुलन की जरूरत होती है।

कॉस्ट बेनीफिट का तत्व
ध्यान रखें कि वैकल्पिक संपत्तियों में निवेश पारंपरिक निवेश की जगह नहीं ले सकता। लेकिन ये केवल उन लोगों के लिए सही रहता है, जो मजबूत नींव पर खड़े किए गए अपने पोर्टफोलियो के जोखिम को बांटकर उसे कम करना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि आमतौर पर इनका संबंध परंपरागत निवेश के साधनों से नहीं होता। मसलन, अगर शेयर मार्केट धड़ाम से गिर जाए, तो उस स्थिति में भी आपके पास मौजूद दुर्लभ पेंटिंग की कीमत में गिरावट होने की संभावना न के बराबर ही होगी। इसके उलट, हो सकता है कि उस पेंटिंग की पहले से अधिक दुर्लभ और अनूठी हो जाने के कारण उसकी कीमत में और इजाफा हो जाए।

महंगाई और मुद्रास्फीति बढ़ने के कारण जब रुपए की क्रय शक्ति काफी घट जाती है, तो उस स्थिति में ऐसी संपत्तियों में किया गया वैकल्पिक निवेश ही आपके पोर्टफोलियो की रक्षा करता है। यही नहीं, भीषण मुद्रास्फीति के दौर में सोने और रियल एस्टेट में किया गया निवेश आपके बाकी इन्वेस्टमेंट को भी काफी हद तक बचा लेता है। फिर शेयर सर्टिफिकेट या डिबेंचर जैसी शुद्ध वित्तीय असैट्स के विपरीत आप अपनी सुंदर कलाकृतियों, एंटीक आइटम्स या कारपेट्स को छूने और देखने का जो आनंद लेते हैं, वो अलग। इससे आपको जो मानसिक संतोष मिलता है, वह किसी दूसरे निवेश से होने वाले आर्थिक लाभ से किसी भी मायने में कमतर नहीं होता।

कुछ नुकसान भी
पेंटिंग, ज्यूलरी और एंटीक पीसेज़ जैसी गैर-परंपरागत संपत्तियों में निवेश का पहला नुकसान तो यही है कि इनसे नियमित आमदनी नहीं होती। जबकि आपको शेयर्स पर लाभांश और बॉण्ड्स पर ब्याज की आय नियमित तौर पर होती रहती है। पेंटिंग, ज्यूलरी और एंटीक पीसेज़ के मालिक होने पर आपको तारीफ और वाहवाही तो खूब मिलेगी, लेकिन पैसा केवल तभी हाथ में आएगा, जब आप इन्हें किसी कद्रदान को बेच डालेंगे। यानी कि इनकी कीमत केवल कागजों पर होती है।

दूसरा, गैर-परंपरागत संपत्तियों में निवेश से हार्ड कैश हासिल करना अक्सर नामुमकिन होता है। क्योंकि इनके ग्राहक बहुत ही मुश्किल से मिल पाते हैं। जबकि आप म्यूचुअल फंड को बेचकर 24 से 48 घंटे के अंदर इनका पैसा हाथ में ले सकते हैं। 

तीसरा, पेंटिंग, ज्यूलरी और एंटीक पीसेज़ जैसी गैर-परंपरागत संपत्तियों को अपने पास रखना भी अपने आप में खर्चीला काम है। इन्हें सुरक्षित रखने, इनका बीमा कराने और चोरी और टूटफूट से बचाने पर काफी रकम खर्च करनी पड़ती है।

और अंत में, शेयर मार्केट को अनुशासित रखने वाली संस्थाओं की तरह आर्ट मार्केट, रियल एस्टेट या ज्यूलरी मार्केट के लिए कोई रेगुलेटर बॉडीज़ नहीं हैं, जो निवेशकों के हितों का बचाव कर सकें। इससे आप मिलावट, धोखे और जालसाजी का शिकार हो सकते हैं।

यहां हम कुछ गैर-परंपरागत निवेश संपत्तियों के बारे में तफसील से बता रहे हैं- 

सिक्के और डाक टिकट

जब आप स्कूल में थे, तो आपने पोस्टल स्टैम्प्प्स और सिक्के तो इकट्ठा किए ही होंगे। उनके डिब्बे पर जमी धूल और जाले साफ कर लीजिए। आपको शायद पता नहीं कि अब इनकी कीमत कई गुणा बढ़ चुकी है। पश्चिमी देशों में ये हॉबी खूब लोकप्रिय है और एंटीक डीलर दुर्लभ सिक्के और टिकट महंगे रेट पर खरीदने के लिए तैयार बैठे रहते हैं। भारत के पुराने सिक्के, खासकर आजादी से पहले के चांदी के सिक्के इन डीलरों को खूब लुभाते हैं। अगर आपके पास इनका अच्छा कलेक्शन है, तो भविष्य में आप भी अच्छी खासी चांदी काट सकते हैं।

सोना और जवाहरात
भारत में कई निवेशकों के लिए सोना और ज्यूलरी ज्यादा परंपरागत निवेश है। आजकल सोने के भाव आसमान पर हैं। इतने ऊंचे दाम पर सोना पहले कभी नहीं बिका। ऐसे में बैंक से गोल्ड बार खरीदकर रखना फायदेमंद हो सकता है। सोना मुद्रास्फीति से बचाव का सबसे मजबूत कवच माना जाता है। भारतीय परिवारों में तो यह सदियों से सबसे सुरक्षित निवेश का साधन बना हुआ है। जहां तक ज्यूलरी का मामला है, इसके डिजाइन और कारीगरी में आने वाले नित नए बदलावों के चलते बिक्री के समय सही कीमत तय करना जरा मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी सौदा कभी नुकसान का नहीं होता।

शॉल, कालीन और एंटीक्स
ये सभी दैनिक उपयोग की चीजें हैं, जो इस्तेमाल के साथ पुरानी पड़ जाती हैं, और नष्ट भी होती हैं। इसलिए आमतौर पर हम ऐसा नहीं सोचते कि एक समय बाद इनकी कीमत क्या हो सकती है। लेकिन पुरानी पीढ़ी से मिले बेहतरीन कारीगरी के नमूने सुंदर शॉल या कालीन आज की तारीख में भी हमें अच्छी कीमत दिला सकते हैं। हालांकि भारत में ऐसे पुराने आइटमों का मार्केट अभी परवान नहीं चढ़ा है, और इन्हें अच्छे दाम पर बेचने में दिक्कतें आती हैं, लेकिन आगे चलकर हालात बदल सकते हैं।

कलाकृतियां वगैरह
भारत में पिछले 15 साल में आर्ट मार्केट ने काफी उन्नति की है, हालांकि अभी ये केवल हाई-नेटवर्थ वाले व्यक्तियों के बीच ही लोकप्रिय है। गौरतलब है कि दिल्ली में गत अगस्त में हुई इंडिया आर्ट समिट में भारतीय कलाकारों को दुनिया के दूसरे देशों ने काफी तवज्जो दी है। हालांकि कलाकृतियों में निवेश से पैसा कमाना अभी आसान नहीं है, मगर इन्हें अपने पास रखने का अलग ही सुख है। आने वाले दस साल में इन कलाकृतियों में निवेश से काफी अच्छा रिटर्न मिलने लगेगा, इसमें शक नहीं। तब इसमें आम निवेशक भी दिलचस्पी लेने लगेंगे।

रियल एस्टेट और ज़मीन
भारत में कई परिवारों के पास कई एकड़ पुश्तैनी जमीन, खेत और अन्य जायदाद हुआ करती थी। समय के साथ-साथ इनका बंटवारा होता चला गया, और इनके हिस्से होते रहे। आपके पास भी ऐसी पैतृक संपत्ति जरूर होगी। आजकल रियल एस्टेट में फिर से बूम आ रहा है। इसलिए अगले दस साल में इस सेक्टर में निवेश फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस सेक्टर में अच्छी आमदनी की उम्मीद से कई परिवार तो कर्ज लेकर भी नए-नए मकान और जमीने खरीद रहे हैं। लेकिन इस सेक्टर में निवेश से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपका निवेश का आधार मजबूत हो।

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