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बचत में बच्चे ही क्यों रहें पीछे !

शुरूआती उम्र से ही बच्चों को निवेश के लिए प्रेरित करें। हालांकि उन्हें इस उम्र में निवेश की बारीकियों के बारे में तो नहीं समझाया जा सकता। लेकिन फिर भी इस उम्र में उन्हें निवेश के बेसिक के बारे में बताया जा सकता है। इस उम्र में बच्चों की इस उम्र में चीजों को ग्रहण करने की क्षमता खासी मजबूत होती है। बच्चों को पैसे की वैल्यू के बारे में बताएं। इस उम्र में उन्हें पैसे बचाने का लक्ष्य दें। मसलन प्रति माह कुछ सौ रुपए बचाने का टारगेट।

स्कूल जाने की उम्र होते ही बच्चों का बैंक खाता खुलवा दें। जब वह अंकगणित को पूरी तरह समझने लगे तो उन्हें कैपिटल, परिसंपत्ति, स्टॉक के बारे में बुनियादी जानकारी दें। इसके अलावा इस उम्र में उन्हें सेविंग ऑप्शन चुनने के लिए भी प्रेरित करें। उन्हें उनके बैंक अकाउंट पर मॉनिटर रखना और पैसे को चेक करते रहने के बारे में भी समझाएं।

क्या बच्चा पैसे की वैल्यू नहीं समझता?
शॉपिंग के दौरान बच्चे का मनपसंद चीज लेने के लिए जिद करना और उसे इसके लिए न कह पाना आपके लिए खासा मुश्किल होता है। कभी-कभी आपको ऐसा लगता होगा कि आपके बच्चों की फिजूलखर्ची की आदत है। वह फाइनेंस सेवी नहीं है। बदलते जमाने में बैंक से लेकर वित्तीय संस्थाएं तक अपनी विभिन्न योजनाओं से युवाओं को लुभाने की कोशिश करने में लगे हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि बच्चे को मनी वैल्यू के बारे में समझाया जाएं। क्योंकि सवाल आपके बच्चे के आने वाले सुनहरे कल का जो है।

क्या करें..
-अपने बच्चे से पैसे के बारे में बात करें।
-बच्चे को बैंक के बारे में शिक्षित करें।
-अपने बच्चे को घर के अकाउंट के बारे में जानकारी दें।
-उन्हें घर की रोजमर्रा के सामानों को खरीदने के लिए भेजें।
-कुछ मामलों पर फैसले लेते वक्त उनकी सलाह लें।

क्या न करें..
-अपनी आदतों और विचारों को बच्चों पर न थोपें
-अपने बच्चों के सामने पैसों के लिए लड़ाई न करें।
-अपने दोस्तों और पड़ोसियों से बच्चों के सामने बहरूपिए बनने से बचें। हवाबाजियां करने से जितना संभव हो दूर रहें।

बच्चे के लिए प्लानिंग करते वक्त
अपने बच्चों के लिए प्लानिंग करते वक्त बस यूं ही किसी के कह देने पर भरोसा न करें। इस मसले पर पूरी तरह से जांच पड़ताल करें। क्योंकि फैसला जो आपके लाड़ले-लाडलियों का है। ऐसे में अगर कुछ बातों को ध्यान में रखकर प्लान किया जाए तो आपकी प्लानिंग पहले से अधिक बेहतर बन सकती है।

इनको ध्यान में रखें
-अलग उद्देश्यों के लिए अलग प्लान : बच्चों के लिए प्लानिंग करते वक्त हर उद्देशय की पूíत के लिए अलग प्लान बनाएं। मान लीजिए कि जब आप बच्चों की शिक्षा के बारे में प्लान कर रहे हैं तो आप ऐसा पोर्टफोलियो चुनिए जिसकी समय सीमा दस साल बाद या फिर दस साल की है। साथ ही वहीं शादी के बारे में सोच रहे हों तो उसके लिए बीस साल की समय सीमा वाला पोर्टफोलियो चुनना बेहतर रहेगा। कहने का मतलब यह है कि अपने उद्देश्यों के बारे में तय कर लें, उनकी समय सीमा का आकलन करें। उसके बाद ही फैसला लें।

फाइनेंशियल प्लानर से सलाह :
अपने उद्देश्यों, समय सीमा को निर्धारित करने के बाद कौन सा प्लान चुना जाए इसको लेकर ऊहोपोह। जाहिर है कि बाजार में इतने सारे प्लान मौजूद हैं, उनमें से एक प्लान चुनना समुद्र में से एक लोटा पानी निकालने जैसा है। ऐसे में फाइनेंशियल प्लानर से सलाह ले सकते हैं। अपने उद्देश्यों, समय सीमा के बारे में फाइनेंसियल प्लानर को बताकर आप अपने लिए मुफीद प्लान का चुनाव कर सकते हैं।

जानकारी लेते रहें
फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लेने के बाद सब कुछ उसके सहारे ही न छोड़ें। उसके द्वारा दी गई राय और प्लान के बारे में सोचने के बाद ही कुछ फैसला लें। और हां, आपके द्वारा बच्चों के लिए किया गए निवेश के बारे में जानकारी करते रहें।

निवेश को टालें नहीं
अगर आपने निवेश के बारे में सोच लिया है तो उसे लंबे समय तक टालें नहीं क्योंकि आप जितनी देर करेंगे, लक्ष्य पाना आपके लिए उतना ही मुश्किल हो जाएगा। कभी-कभी ऐसी स्थिति भी आती है कि आपने प्लानिंग कर ली, बेहतर विकल्प भी चुन लिया, लेकिन जेब में पैसा नहीं। ऐसे में अकसर ऐसी धारणा बनती है कि जब समय आएगा तो देखा जाएगा। देखिए ऐसे में बेहतर यह होगा कि परिस्थति के अनुसार ही कोई बेहतर प्लान चुनें।

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