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26 मई, 2020|11:28|IST

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दो टूक (03 अक्तूबर, 2009)

नोएडा में बीपीओ कंपनी का वाई-फाई टावर गिरने को महज हादसा नहीं मानना चाहिए। यह संचार क्रांति की तेज रफ्तार और स्थानीय स्तर पर आधी-अधूरी तैयारियों की पोल खोलने वाला इशारा भी है। इमारतों की छतों पर तेजी से बढ़ते टावर्स का जंगल पहले भी लोगों को डराता रहा है।

इनकी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के दुष्प्रभावों की आशंका से घबराए और इन्हें चलाने वाले विशालकाय जनरेटरों की थर्राहट से सहमे लोग अदालत तक गुहार लगा चुके हैं। इस घटना ने बता दिया है कि ऐसे टावर्स लगाने और इनके उत्सर्जन के लिए मानक तय करना वक्त की जरूरत है। इसके लिए बड़े स्तर पर स्पष्ट और दूरगामी फैसले लेने होंगे और स्थानीय प्रशासन को भी अपनी लापरवाही से धूल झाड़नी होगी।

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  • Web Title:दो टूक (03 अक्तूबर, 2009)