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सुनामी से निकली एक मजबूत टीम

सुनामी की तबाही का मंजर आज भी उनके जेहन में है। ..सबकुछ बह गया था..किसी का तो पूरा का पूरा परिवार काल के गाल में समा गया था। सरकार ने स्टेडियम इनका रैन बसेरा बनाया और वहां  दूसरों को खेलते हुए देखते-देखते उनकी अपनी फुटबाल टीम तैयार हो गई। पांडिचेरी ये 14 लड़कियां हल्द्वानी में कमाल कर रही हैं। नेशनल अंडर-16 बालिका फुटबाल के क्वार्टर फाइनल तक पहुंच गई हैं। शावलिन सॉकर की करिश्माई खिलाड़ियों की तरह ये बच्चाियां चैंपियन बन के लौटें तो हैरत नहीं।

26 दिसंबर 2004 को आई सुनामी ने भारत के कई हिस्सों में भी तबाही मचाई थी। परिवार बिखरने और घर टूटने के बाद पांडिचेरी सरकार ने कई परिवारों का रैना बसेरा स्टेडियम में बना दिया। स्टेडियम में रह रहे बेसहारा परिवारों की नन्हीं पौध खिलाड़ियों का खेल देखते देखते खेलना सीख गई। मारी अप्पर ने इन्हें कोचिंग देनी शरू की। रैन बसेरे की ये 14 लड़कियां आज उनकी अंडर-16 बालिका फुटबाल टीम में हैं। इनमें से राधा गुजरी अप्रैल में श्रीलंका में आयोजित एशियन कप की चैंपियन भारतीय टीम की गोलकीपर रह चुकी हैं।

राधा ने अपने पिता सुनामी में खो दिये थे, मां लोगों के घरों में झाड़ू पोछा करके घर चलाती है।  टीम में वाराह लक्ष्मी, राम्या, राधा, सुमित्र, राधिका, कंजिदा, संगीथा, तेनमुरि जैसे कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सुनामी में बहुत कुछ खोया, पर आज अपने दम पर नया मुकाम बना डाला। इन खिलाड़ियों का एक ही सपना हैं, कि भारत को इंटरनेशनल चैंपियन बनाना। 

बेहतरीन प्रदर्शन करके टीम ने असम, केरल और दिल्ली की टीमों को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर सभी के होश उड़ा दिए। ये खिलाड़ी सरकारी स्टेडियम में ही रहते हैं और एगास एसोसिएशन जर्सी, जूते व खेल से सम्बंधित अन्य संसाधन एवं अन्य खर्च वहन करती है।

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